जम्मू-कश्मीर में मानसून का कहर जारी, तीन दिन में 25 मौतें; वैष्णो देवी और अमरनाथ यात्रा तीसरे दिन भी बंद
जम्मू-कश्मीर में लगातार तीसरे दिन भी भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से हालात गंभीर बने हुए हैं। कई जिलों में सड़क संपर्क टूट गया है, जबकि पहाड़ी इलाकों के सैकड़ों गांव जिला मुख्यालयों से कट गए हैं। बीते तीन दिनों में बारिश और इससे जुड़ी घटनाओं में 25 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें सबसे ज्यादा 21 मौतें राजौरी और पुंछ जिलों में हुई हैं।
मंगलवार को उधमपुर और रामबन में कई स्थानों पर पहाड़ से चट्टानें गिरने के कारण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभावित रहा। जम्मू-पठानकोट हाईवे भी जलभराव की चपेट में रहा, जबकि भूस्खलन के चलते राजौरी-पुंछ हाईवे करीब ढाई घंटे तक बंद रहा। तवी, चिनाब समेत प्रदेश की अधिकांश नदियां और नाले उफान पर हैं।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने राहत और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि राजौरी और पुंछ में क्षतिग्रस्त 435 सड़कों में से 356 को यातायात के लिए बहाल कर दिया गया है। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी उपराज्यपाल से फोन पर बात कर बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली और राहत एवं पुनर्वास कार्यों के लिए केंद्र की ओर से हरसंभव मदद का भरोसा दिया।
रियासी जिले में चिनाब नदी पर स्थित सलाल जलविद्युत परियोजना के सभी बैराज खोल दिए गए हैं। वहीं, बड़गाम के बीरबाह इलाके में सुखनाग नाले में आई बाढ़ की चपेट में पूरा शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बह गया। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत की भी सूचना है।
खराब मौसम को देखते हुए श्री अमरनाथ यात्रा, माता वैष्णो देवी यात्रा और शिवखोड़ी यात्रा लगातार तीसरे दिन भी स्थगित रखी गई। कटड़ा में करीब 20 हजार श्रद्धालु यात्रा शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। पिछले तीन दिनों में कटड़ा में लगभग 300 मिमी बारिश दर्ज की गई है। दूसरी ओर, जम्मू, बालटाल और पहलगाम आधार शिविरों में भी हजारों श्रद्धालु मौसम साफ होने और प्रशासन से हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
कटड़ा स्थित वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर कई स्थानों पर पत्थर गिरने की घटनाएं हुईं, लेकिन यात्रा पहले से बंद होने के कारण कोई जनहानि नहीं हुई।
जम्मू जिले के खौड़ क्षेत्र में आकाशीय बिजली गिरने से एक मकान क्षतिग्रस्त हो गया। घर में दरारें पड़ गईं, खिड़कियां टूट गईं और बिजली के उपकरण जल गए। ज्यौड़ियां क्षेत्र में चक भगवाना खड्ड का जलस्तर बढ़ने से कई गांवों का संपर्क करीब तीन घंटे तक बाधित रहा। सांबा-मानसर-उधमपुर मार्ग भी बारिश से प्रभावित रहा, जबकि सुंब ब्लॉक के 70 से 80 गांवों में बिजली आपूर्ति ठप रही। कठुआ जिले के बिलावर में भीनी नदी में फंसे दो युवकों को सुरक्षित बचा लिया गया। वहीं, जम्मू-पठानकोट हाईवे पर कई जगह दो से तीन फुट तक पानी भर गया।
कश्मीर घाटी में श्रीनगर, पुलवामा, बांदीपोरा समेत कई जिलों में दिनभर रुक-रुककर बारिश होती रही। प्रशासन ने सभी जिलों में नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं। सिविल डिफेंस और पुलिस की टीमें लगातार लोगों को नदी-नालों और जलस्रोतों से दूर रहने की सलाह दे रही हैं, जबकि राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है।
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