तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए कश्मीर का मुद्दा उठाया। उन्होंने दक्षिण एशिया में कश्मीर सहित सभी विवादों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों के तहत बातचीत के जरिए हल करने की बात कही।
एर्दोगन ने कहा कि क्षेत्र में रचनात्मक कदम उठाकर विवादों का समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने इसी संदर्भ में अफ्रीका में जारी तनाव और विवादों का भी उल्लेख किया। भारत का रुख रहा है कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न हिस्सा है और इस मुद्दे पर किसी तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार्य नहीं है।
पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौते के बाद आया बयान
एर्दोगन का कश्मीर पर यह बयान तुर्किये, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच त्रिपक्षीय रक्षा समझौते के कुछ सप्ताह बाद आया है। इस समझौते के बाद तीनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही थी।
रियाद के समर्थन में चार देशों का संयुक्त बयान
संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर तुर्किये, पाकिस्तान, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों की बैठक भी हुई। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में चारों देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सऊदी अरब के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया।
बयान में क्षेत्र में समुद्री आवाजाही की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। यह घटनाक्रम यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की ओर से क्षेत्र में जारी हमलों के बीच सामने आया है।
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