अमेरिका का टूरिस्ट या बिजनेस वीजा हासिल करने के लिए लंबी प्रतीक्षा झेल रहे आवेदकों को जल्द राहत मिल सकती है।
अमेरिकी प्रशासन ने एक नया पायलट प्रोग्राम शुरू करने की घोषणा की है, जिसके तहत अतिरिक्त 750 डॉलर शुल्क देकर वीजा इंटरव्यू की प्रक्रिया को तेज कराया जा सकेगा। 1 जुलाई से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम के तहत बी1 (बिजनेस) और बी2 (टूरिस्ट) नॉन-इमिग्रेंट वीजा आवेदक कुछ चुनिंदा अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में प्रीमियम शुल्क का भुगतान कर 10 कार्यदिवसों के भीतर इंटरव्यू स्लॉट प्राप्त कर सकेंगे। यह पायलट प्रोग्राम 31 दिसंबर तक लागू रहेगा।
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आवेदकों को अगली उपलब्ध अपॉइंटमेंट के लिए महीनों या कुछ मामलों में एक साल से अधिक समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, प्रीमियम सुविधा का लाभ लेने वाले आवेदकों को नियमित 185 डॉलर वीजा प्रोसेसिंग फीस के अलावा 750 डॉलर अतिरिक्त शुल्क भी देना होगा।
फेडरल रजिस्टर में जारी नोटिस के अनुसार, 2026 फीफा वर्ल्ड कप और 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को देखते हुए अमेरिका में वीजा मांग बढ़ने की संभावना है। इसी वजह से इस फास्ट-ट्रैक सेवा को परीक्षण के तौर पर शुरू किया जा रहा है।
यह पहल ट्रंप प्रशासन की हालिया आव्रजन नीतियों के बीच आई है। हाल के महीनों में प्रशासन ने कुछ देशों के यात्रियों के लिए प्रवेश नियमों को और सख्त किया है। अगस्त में विदेश विभाग ने एक पायलट प्रोग्राम का ऐलान किया था, जिसके तहत कुछ देशों के यात्रियों से 15,000 डॉलर तक का बांड लेने का प्रस्ताव रखा गया। वहीं, दिसंबर में अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन ने विदेशी पर्यटकों की सोशल मीडिया गतिविधियों की अतिरिक्त जांच की योजना भी पेश की थी।
अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि 750 डॉलर की प्रीमियम सेवा केवल इंटरव्यू स्लॉट जल्दी उपलब्ध कराने के लिए है। इससे वीजा मंजूरी की कोई गारंटी नहीं मिलती और न ही प्रशासनिक जांच (Administrative Processing) में लगने वाला समय कम होता है।
यह सुविधा सीमित संख्या में आवेदकों के लिए और केवल चुनिंदा दूतावासों एवं वाणिज्य दूतावासों में उपलब्ध होगी। फिलहाल सरकार ने उन मिशनों की सूची जारी नहीं की है जहां यह सेवा शुरू की जाएगी।
यह पायलट प्रोग्राम उन देशों के नागरिकों पर लागू नहीं होगा जो अमेरिका के वीजा-वेवर प्रोग्राम का हिस्सा हैं। इस सूची में यूरोप के अधिकांश देशों के अलावा ऑस्ट्रेलिया, चिली, इजरायल, जापान, कतर, दक्षिण कोरिया और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश शामिल हैं।
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