जम्मू-कश्मीर में मंत्रिमंडल विस्तार से बढ़ी सियासी हलचल, चार मंत्रियों को हटाने की मांग

2

जम्मू-कश्मीर में उमर सरकार की बढ़ी मुश्किलें, 21 विधायकों ने खोला मोर्चा; चार मंत्रियों को हटाने की मांग

जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। शुक्रवार को पार्टी के 21 नाराज विधायकों ने पूर्व मंत्री कैसर जमशेद लोन के आवास पर बैठक कर अपनी नाराजगी जाहिर की। करीब तीन घंटे तक चली इस बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर सहमति बनी। सूत्रों के मुताबिक, विधायकों ने चार मंत्रियों को हटाने के साथ मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी और पार्टी कोषाध्यक्ष शम्मी ओबराय को पद से हटाने की मांग भी उठाई।

मंत्रियों के कार्यकाल को लेकर उठाए सवाल
बैठक में विधायकों ने प्रस्ताव रखा कि जिन मंत्रियों को पद संभाले दो साल हो चुके हैं, उन्हें हटाकर दूसरे विधायकों को जिम्मेदारी दी जाए। इसके अलावा जून में श्रीनगर के डाचीगाम में हुई पार्टी बैठक के फैसलों को भी लागू करने की मांग की गई। इस संबंध में नजीर गुरेजी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है, जो जल्द ही फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात कर विधायकों के प्रस्ताव सौंपेगी।

कैबिनेट विस्तार से नाराज हुए कई विधायक
दरअसल, मंगलवार को उमर अब्दुल्ला ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए चार नए मंत्रियों को शपथ दिलाई थी। इस फेरबदल में सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया। वहीं, मंत्री बनने की उम्मीद लगाए बैठे कई विधायकों को जगह नहीं मिली। इससे पार्टी के भीतर नाराजगी बढ़ गई। शुक्रवार की बैठक में राजौरी-पुंछ क्षेत्र के विधायक भी शामिल हुए। थन्नामंडी के विधायक मुजफ्फर इकबाल खान पहले ही अपने क्षेत्र को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं मिलने पर सवाल उठा चुके हैं।

आगा रुहुल्ला के इस्तीफे से भी बढ़ सकती है परेशानी
नेकां नेतृत्व के सामने बागी सांसद आगा सैयद रुहुल्ला की नाराजगी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। रुहुल्ला तीन नवंबर को पार्टी और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के अपने फैसले पर कायम हैं। उन्होंने अपनी प्रस्तावित रैली के लिए लोगों से बड़गाम में जिला उपायुक्त कार्यालय के पास पहुंचने की अपील की है। बड़गाम में पहले ही रुहुल्ला की नाराजगी का असर उपचुनाव में देखने को मिला था, जहां नेकां को हार का सामना करना पड़ा। यदि वह लोकसभा सीट छोड़ते हैं तो श्रीनगर संसदीय सीट पर उपचुनाव पार्टी के लिए नई चुनौती बन सकता है।

मुबारक गुल से छीना महासचिव का पद
इस बीच पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने विधायक मुबारक गुल को महासचिव पद से हटा दिया है। मंगलवार को ही उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब मंत्री अली मोहम्मद सागर को अगले आदेश तक दोबारा महासचिव का कार्यभार संभालने को कहा गया है।

मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज गुल ने सार्वजनिक रूप से अपनी असहमति जताई थी। उन्होंने बताया था कि उनके समर्थक उन पर पार्टी और महासचिव पद छोड़ने का दबाव बना रहे हैं। गुल ने चार नवंबर को अपने अगले कदम का एलान करने की बात कही थी। शुक्रवार रात को उनके समर्थकों ने श्रीनगर में मशाल जुलूस भी निकाला।

बगावत रोकने में जुटा पार्टी नेतृत्व
पार्टी के अंदरूनी घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, नेतृत्व को आशंका थी कि तीन नवंबर को आगा रुहुल्ला की रैली के बाद मुबारक गुल भी महासचिव पद छोड़ने की घोषणा कर सकते हैं। इससे पार्टी के भीतर असंतोष और बढ़ सकता था। इसलिए उन्हें पहले ही पद से मुक्त कर दिया गया। अब नेकां नेतृत्व के सामने नाराज विधायकों को मनाने, मंत्रिमंडल को लेकर उठ रही मांगों पर विचार करने और पार्टी में बढ़ते असंतोष को नियंत्रित करने की चुनौती है।

Comments are closed.