अनाक क्राकाटोआ में जोरदार धमाका, आसमान में 50 हजार फीट तक फैली राख; कई फ्लाइट्स रद्द

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इंडोनेशिया के सुंडा स्ट्रेट में स्थित अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी में रविवार तड़के अचानक विस्फोट हो गया।

ज्वालामुखी से निकली राख का गुबार आसमान में करीब 50,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया। राख के फैलने से हवाई यातायात प्रभावित हुआ और जकार्ता के सोएकार्नो-हट्टा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कुछ घंटों के लिए उड़ानों का संचालन रोक दिया गया।

30 सेकंड तक हुआ विस्फोट

इंडोनेशिया की जियोलॉजिकल एजेंसी के मुताबिक, जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच स्थित अनाक क्राकाटोआ में शनिवार से ही ज्वालामुखीय गतिविधियां बढ़ने लगी थीं। रविवार सुबह करीब 3:53 बजे इसमें विस्फोट हुआ, जो लगभग 30 सेकंड तक जारी रहा।

अभी तक इस घटना में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है। हालांकि, सुरक्षा को देखते हुए अधिकारियों ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सक्रिय क्रेटर से कम से कम तीन किलोमीटर दूर रहने की चेतावनी दी है।

कई उड़ानों पर पड़ा असर

ज्वालामुखी की राख हवाई मार्गों तक पहुंचने के बाद सोएकार्नो-हट्टा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया। एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार, सुबह 5:30 बजे से 9:30 बजे तक उड़ानों का संचालन प्रभावित रहा।

उड़ानों के रद्द होने और देरी के कारण एयरपोर्ट पर यात्रियों की भीड़ बढ़ गई। कई यात्रियों ने टिकट का रिफंड मांगा और चेक-इन किया हुआ सामान वापस लिया।

50 हजार फीट तक पहुंचा राख का गुबार

इंडोनेशिया की ज्वालामुखी विज्ञान एजेंसी और ऑस्ट्रेलिया के डार्विन ज्वालामुखी राख सलाहकार केंद्र ने सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए ज्वालामुखी से निकले राख के दो बड़े गुबारों की पहचान की है।

एक गुबार करीब 20,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंचा और उत्तर-पूर्व दिशा में बढ़ा। इसकी वजह से जकार्ता, बैंटेन और पश्चिमी जावा के कुछ हिस्सों सहित आसपास के समुद्री क्षेत्र प्रभावित हुए।

दूसरा राख का गुबार करीब 50,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंचा और पश्चिम तथा उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ा। इसके चलते बैंटेन, लैम्पंग और बेंकुलु के साथ दक्षिणी सुंडा स्ट्रेट और सुमात्रा के पश्चिम में हिंद महासागर के बड़े हिस्से में राख फैलने की सूचना है।

2018 में भी आई थी विनाशकारी सुनामी

अनाक क्राकाटोआ पहले भी बड़े हादसे का कारण बन चुका है। दिसंबर 2018 में ज्वालामुखी के विस्फोट के बाद समुद्र के भीतर भूस्खलन हुआ था, जिससे जावा और सुमात्रा के तटीय इलाकों में विनाशकारी सुनामी आई थी। इस आपदा में कम से कम 430 लोगों की मौत हुई थी।

ताजा विस्फोट के बाद अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और ज्वालामुखी के आसपास रहने वाले लोगों तथा पर्यटकों को जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

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