राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: 40 दिन में 70 वारदात, SIT रिपोर्ट ने खोले 20 बड़े राज

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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई अहम खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जांच में चढ़ावे की गणना के दौरान 70 बार चोरी की घटनाएं दर्ज हुईं। एसआईटी का कहना है कि इससे पहले की फुटेज उपलब्ध नहीं होने के कारण कुल चोरी की वास्तविक सीमा का आकलन फिलहाल नहीं किया जा सका है।

प्रदेश सरकार ने 13 जून को इस मामले की जांच के लिए लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। टीम ने 15 जून से जांच शुरू की और एक सप्ताह के भीतर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी। अब इस रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष सामने आए हैं।

सीसीटीवी फुटेज में कैद हुईं संदिग्ध गतिविधियां

एसआईटी के अनुसार, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में गणना कक्ष में तैनात कुछ कर्मचारी बार-बार नोटों की गड्डियां और खुले नोट कपड़ों, जेबों, जूतों व अन्य स्थानों पर छिपाते दिखाई दिए। कई फुटेज में अन्य कर्मचारियों को भी उनका सहयोग करते हुए देखा गया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जांच अवधि के दौरान ऐसी 70 घटनाएं रिकॉर्ड हुईं।

छह कर्मचारियों पर कार्रवाई की सिफारिश

प्रारंभिक जांच में अविनाश शुक्ला, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और रमाशंकर मिश्रा की कथित भूमिका सामने आने का दावा किया गया है। एसआईटी ने इन सभी के खिलाफ चोरी, चोरी की संपत्ति रखने, आपराधिक षड्यंत्र और अन्य संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है।

लंबे समय से जारी थी चोरी, सुरक्षा में मिलीं गंभीर खामियां

रिपोर्ट के मुताबिक, चढ़ावे की नकदी की गणना के दौरान सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था में मौजूद कमियों का फायदा उठाकर लंबे समय तक चोरी की जाती रही। जांच में पाया गया कि मंदिर की हुंडियों से निकाली गई नकदी को ट्रस्ट और बैंक प्रतिनिधियों की मौजूदगी में गणना कक्ष तक लाया जाता था, लेकिन हुंडीवार रिकॉर्ड रखने और अलग-अलग गणना करने के बजाय कई बार रकम को पहले ही मिला दिया जाता था। नकदी ले जाने वाले बक्सों की ट्रैकिंग व्यवस्था भी प्रभावी नहीं थी, जिससे जवाबदेही तय करना मुश्किल हो गया।

78.94 लाख रुपये पहले ही किए जा चुके थे बरामद

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जांच शुरू होने से पहले ही ट्रस्ट कर्मचारियों से लगभग 78.94 लाख रुपये बरामद कर चुका था। इसके अलावा विदेशी मुद्रा, कुछ बहुमूल्य वस्तुएं और गणना कक्ष से सटे शौचालय से 2.25 लाख रुपये भी मिले थे। रिपोर्ट के अनुसार, इन बरामदगियों का संबंध उन्हीं कर्मचारियों से जोड़ा गया है जिनकी गतिविधियां सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध पाई गईं। जांच में संबंधित कर्मचारियों और उनके परिजनों के बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकद जमा, एफडी और अन्य वित्तीय लेनदेन भी सामने आए।

ट्रस्ट और बैंक की व्यवस्था पर भी उठे सवाल

एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्ट और बैंक की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन नहीं किया गया। कर्मचारियों की प्रवेश और निकास के समय फ्रिस्किंग नहीं हुई, जेब रहित वर्दी लागू नहीं की गई, निजी सामान ले जाने पर प्रभावी रोक नहीं थी, बायोमीट्रिक उपस्थिति व्यवस्था कमजोर रही और हुंडीवार गणना की प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया। एसआईटी ने इन कमियों को चोरी की घटनाओं के पीछे प्रमुख कारणों में शामिल बताया है।

एसआईटी रिपोर्ट के 20 बड़े खुलासे
1. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की गणना के दौरान चोरी/गबन की पुष्टि ।

2. 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में 70 बार चोरी जैसी गतिविधियां रिकार्ड होने का उल्लेख है, परन्तु 24 अप्रैल 2026 से पूर्व के सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं होने के चलते गबन चोरी की घटनाओं का वास्तविक आकलन नहीं हो पाया।

3. छह गणना कर्मी—अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रमाशंकर मिश्रा—प्रथम दृष्टया संलिप्त पाए गए।

4. ट्रस्ट द्वारा एसआईटी गठन से पहले ही संदिग्धों से करीब 78.94 लाख रुपये, विदेशी मुद्रा, बहुमूल्य वस्तुएं और 2.25 लाख रुपये अलग से बरामद करने का दावा।

5. कर्मचारियों के बैंक खातों में आय से कहीं अधिक नकद जमा और वित्तीय लेन-देन मिलने की बात।

6. चोरी की रकम रिश्तेदारों के खातों में जमा करने और संपत्ति अर्जित करने के संकेत; विस्तृत आर्थिक जांच की सिफारिश।

7. गणना कक्ष में फ्रिस्किंग (तलाशी), जेब रहित वर्दी, निजी सामान पर रोक और बायोमीट्रिक व्यवस्था लागू नहीं की गई।

8. हुंडीवार गणना नहीं हुई, अलग-अलग हुंडियों की रकम मिलाकर गिनती की गई।

9. ट्रस्ट और बैंक के बीच बनी SOP का पालन नहीं हुआ, जिससे चोरी की परिस्थितियां बनीं।

10. ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. अनिल मिश्रा पर निगरानी और एसओपी लागू कराने में विफल रहने का आरोप।

11. गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव पर सुरक्षा व्यवस्था लागू न करने और गंभीर लापरवाही का आरोप।

12. रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू बिना औपचारिक आदेश के हुंडियों की चाबियां संभालते रहे और उनके रिश्तेदार को गणना कार्य में लगवाया गया।

13. सोशल मीडिया पर वायरल चांदी की ईंटों और अन्य बहुमूल्य चढ़ावे के गायब होने के आरोप जांच में सही नहीं पाए गए; वस्तुएं रिकॉर्ड में मिलीं।

14. ऑडिट रिपोर्ट में पहले ही 180 दिन तक सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और कई सुधार सुझाए गए थे, लेकिन उनका पालन नहीं हुआ।

15- डा.अनिल मिश्र के स्तर पर ट्र्स्ट प्रतिनिधियों के रूप में भेंट, चढ़ावा पात्र प्रबंधन के विषय में 20 सितंबर 2024 एवं संयुक्त रूप से निर्धारित दिशा निर्देश 6 फरवरी 2025
बैंक के साथ संयुक्त रूप से जारी किये गये। अनिल मिश्र का दायित्व था कि जारी निर्देशों का क्रियान्वयन अक्षरश: हो रहा है या नहीं, इसकी सतत समीक्षा करें परन्तु इसका अभाव परिलक्षित हुआ।

16-सुभाष श्रीवास्तव के पास गणना कक्ष की जिम्मेदारी थी और चोरी की घटना गणना कक्ष में हुई। नियमित रूप से तलाशी न होने देना चोरी का मुख्य कारण रहा। गणना प्रभारी के रूप में ऐसी घटना के लिए वह प्रमुख रूप से उत्तरदायी हैं।

17-रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू मंदिर परिसर के विभिन्न स्थानों पर स्थिति हुंडियों की चाबी ट्र्स्ट के प्रतिनिधि के रूप में अपने पास रखते थे, जबकि उनके पास ऐसा प्राधिकार नहीं था। इनकी सिफारिश पर इनके रिश्तेदार मनीष यादव को गणना ड्यूटी में लगाया गया, जिससे उसे गबन का अवसर मिला।

18-बैंक के उत्तरदायी अधिकारियों को द्वारा गणना कर्मियों को निर्धारित वेशभूषा नहीं उपलब्ध करायी गयी, बैंक कर्मी गणना कार्य के दौरान उपस्थित रहते थे। बैंक अधिकारियों ने प्राविधानों के मुताबिक मासिक रोटेशन का पालन भी नहीं किया।

19. गणना कक्ष में सीसीटीवी का सर्तकता से निगरानी होती तो यह घटना नहीं होती। इतना महत्वपूर्ण गणना के लिए अगर 45 दिन की सीसीटीवी फुटेज संरक्षित रखना सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं था। पूरी फुटेज सुरक्षित होनी चाहिये थी।

20-एसआईटी ने छह आरोपित कर्मचारियों तथा संबंधित पर्यवेक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आपराधिक जांच की सिफारिश की है। साथ ही स्पष्ट किया है कि यह प्रारंभिक रिपोर्ट है, अंतिम जांच अभी जारी है।

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