अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है।
दोनों देशों के बीच जारी वार्ता के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) की शर्तों को पूरी तरह लागू नहीं किया जाता, तब तक किसी अंतिम समझौते पर बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी। तेहरान ने यह भी कहा है कि यदि हालात बिगड़ते हैं तो वह युद्ध के लिए भी तैयार है।
ईरानी संसद के स्पीकर और वरिष्ठ नेता मोहम्मद बागेर गालीबफ ने मंगलवार को एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि मौजूदा बातचीत का उद्देश्य अंतिम समझौता नहीं, बल्कि एमओयू के 14 बिंदुओं को लागू करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने हालिया समझौते के तहत किए गए अपने सभी वादों का पालन नहीं किया है, इसलिए अंतिम वार्ता का कोई सवाल ही नहीं उठता।
गालीबफ ने कहा, “यदि दूसरा पक्ष एमओयू की प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता है, तो ईरान हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार है।” उन्होंने फारस की खाड़ी में हाल की घटनाओं का हवाला देते हुए अमेरिका पर समझौते के उल्लंघन का भी आरोप लगाया।
ईरानी नेता ने दावा किया कि एमओयू लागू होने के बाद ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी हटाई गई, जिससे देश को बड़ा आर्थिक लाभ मिला। उनके अनुसार, इसके बाद ईरान 4 करोड़ बैरल से अधिक तेल का निर्यात कर चुका है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी ईरान ने अपना सख्त रुख दोहराया। गालीबफ ने कहा कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर ईरान और ओमान का संप्रभु अधिकार है। उन्होंने कहा कि एमओयू की 60 दिन की अवधि पूरी होने के बाद यहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूला जाएगा।
वहीं, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बागई ने स्पष्ट किया कि फिलहाल अमेरिका के साथ किसी उच्च-स्तरीय राजनीतिक बैठक की योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि कतर की राजधानी दोहा में जो बातचीत चल रही है, वह केवल एमओयू के क्रियान्वयन और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों की रिहाई जैसे तकनीकी मुद्दों तक सीमित है।
कतर ने भी पुष्टि की है कि दोहा में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी है, लेकिन किसी अंतिम समझौते या उच्च-स्तरीय राजनीतिक वार्ता की अभी कोई तारीख तय नहीं हुई है।
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