अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में जेल में बंद आठों आरोपितों की न्यायिक हिरासत एक बार फिर बढ़ा दी गई है।
विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत ने शनिवार को सभी आरोपितों की रिमांड 14 दिनों के लिए बढ़ाते हुए उन्हें 18 सितंबर तक जेल में रखने का आदेश दिया।
वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई सुनवाई में अविनाश शुक्ल, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्र, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, करुणेश पांडेय, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाषचंद्र श्रीवास्तव को अदालत के सामने पेश किया गया। आरोपितों की न्यायिक रिमांड बढ़ाए जाने का यह सातवां मौका है।
मामले की जांच को करीब 72 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस ने अभी तक आरोप पत्र दाखिल नहीं किया है। इस बीच आरोपितों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अदालत में अर्जी दाखिल की थी। इसमें रिमांड के लिए लगाई गई धाराओं और बरामदगी की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई गई थी। हालांकि, अदालत ने यह अर्जी खारिज कर दी।
आठों आरोपितों ने मांगी जमानत
शनिवार को सभी आठ आरोपितों की ओर से जमानत अर्जी भी अदालत में दाखिल की गई। 26 जून से जेल में बंद आरोपितों ने करीब 72 दिन बाद जमानत के लिए आवेदन किया है। अदालत ने अर्जियों को स्वीकार करते हुए संबंधित थाने से मामले में आख्या तलब की है।
जमानत अर्जी में आरोपितों ने खुद को निर्दोष बताया है। उनका कहना है कि पुलिस की जांच में अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मंदिर परिसर से किस आरोपित ने कितनी रकम चोरी की।
बरामदगी को लेकर पुलिस पर सवाल
आरोपितों ने जमानत अर्जी में एसआईटी की रिपोर्ट का भी हवाला दिया है। उनके मुताबिक, मंदिर ट्रस्ट ने करीब 81.19 लाख रुपये, विदेशी मुद्रा, आभूषण और अन्य कीमती सामान बरामद किए जाने की जानकारी दी थी।
अर्जी में आरोप लगाया गया है कि ट्रस्ट द्वारा बताई गई इन्हीं वस्तुओं को विवेचक ने 26 जून को ट्रस्टी और मुकदमे के वादी कृष्णमोहन के कब्जे व नियंत्रण वाले लॉकर से आरोपितों की निशानदेही पर बरामद दिखाया और उन्हें चोरी का सामान बताया।
आरोपितों ने इस बरामदगी को संदिग्ध बताते हुए दावा किया कि ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों को बचाने के लिए उन्हें मामले में फंसाया गया है।
पुलिस का दावा, निशानदेही पर हुई बरामदगी
दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि आरोपितों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई और उनकी निशानदेही पर संदिग्ध ठिकानों से कई बहुमूल्य वस्तुएं बरामद की गईं।
मामले में पुलिस की जांच जारी है और अभी आरोप पत्र अदालत में दाखिल नहीं किया गया है। आरोपित इससे पहले भी गिरफ्तारी, रिमांड और पुलिस की कार्यशैली को लेकर अदालत में आपत्तियां दर्ज करा चुके हैं। उनकी पिछली अर्जी अदालत द्वारा खारिज की जा चुकी है।
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