मालदा हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट की फटकार, NIA से मांगी दो महीने में जांच रिपोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मालदा हिंसा मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को जांच में तेजी लाने का निर्देश देते हुए कहा है कि पूरी जांच अधिकतम दो महीने के भीतर पूरी की जाए।

एक अप्रैल को हुई इस घटना में भीड़ ने सात न्यायिक अधिकारियों और एक बच्चे को कई घंटों तक बंधक बनाकर रखा था। मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi की पीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान एनआईए से जांच की स्थिति पर सवाल किया। अदालत ने कहा कि एजेंसी जांच पूरी करने के बाद सक्षम अदालत में अपनी रिपोर्ट और चार्जशीट दाखिल करे ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सके।

एनआईए की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत को बताया कि एजेंसी जल्द विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करेगी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में देरी उचित नहीं है और इसे जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए।

पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एनआईए को अधिकतम दो महीने के भीतर जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल करनी चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इसके बाद कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले 24 अप्रैल को भी सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए को जांच पूरी होने पर चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति दी थी। बाद में चुनाव आयोग की शिकायत के आधार पर शीर्ष अदालत के निर्देश पर एजेंसी ने मामले की जांच अपने हाथ में ली थी।

यह मामला उस दौरान सामने आया था जब पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से हटाए गए लोगों की 60 लाख से अधिक आपत्तियों के निपटारे के लिए तैनात किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना का स्वत: संज्ञान कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा भेजे गए पत्र के आधार पर लिया था। पत्र में एक अप्रैल की रात हुई हिंसा और न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की पूरी घटना का जिक्र किया गया था। हिंसा के दौरान तीन महिला न्यायिक अधिकारियों समेत सात अधिकारियों और एक पांच वर्षीय बच्चे को करीब नौ घंटे तक बिना भोजन और पानी के बंधक बनाकर रखा गया था, जिससे पूरे न्यायिक तंत्र में चिंता पैदा हो गई थी।

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