सुप्रीम कोर्ट ने नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई है।
पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज 13 प्राथमिकी रद्द करने की अनुमति मांगी है। साथ ही, प्रदर्शन के दौरान मौके पर मौजूद 2,873 लोगों के खिलाफ नया मामला दर्ज कर हिंसा में उनकी भूमिका की जांच की मांग की गई है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध पर मामले की तत्काल सुनवाई के लिए सहमति दी। दिन की कार्यवाही खत्म होने से ठीक पहले मेहता ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत एक अंतरिम आवेदन दाखिल करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि आवेदन 13 प्राथमिकी रद्द करने से संबंधित है।
समझौते पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई सहमति
पीठ ने कहा कि यदि मामले से जुड़े पक्षकार आपसी समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं तो अदालत को इसमें कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद मामले को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की सहमति दी गई।
याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार के 25 जुलाई के फैसले के मद्देनजर दिल्ली पुलिस कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी 13 प्राथमिकी में आगे की कार्रवाई नहीं करना चाहती।
2,873 लोगों की भूमिका की होगी जांच
याचिका के मुताबिक, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के डेटाबेस में गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों की पहचान हुई है, जो प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे। पुलिस का कहना है कि हिंसा में उनकी कथित भूमिका का पता लगाने के लिए जांच जरूरी है।
सीजेपी ने फिर किया दिल्ली मार्च का ऐलान
इस बीच, सीजेपी ने दिल्ली में एक और विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है। संगठन का आरोप है कि केंद्र ने 25 जुलाई को किए गए वादों को पूरा नहीं किया, जिसके बाद 36 दिनों तक चला उसका आंदोलन समाप्त हुआ था।
सीजेपी के अनुसार, शिक्षक दिवस पर होने वाले मार्च का नेतृत्व उन छात्रों के परिजन करेंगे, जिन्होंने नीट रद्द करने और दोबारा परीक्षा कराने की मांग से जुड़े घटनाक्रम के बाद कथित तौर पर आत्महत्या की थी। जुलाई के आंदोलन के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाई का सामना करने वाले छात्रों के परिजन भी मार्च में शामिल होंगे।
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