जान पर बन आई थी, फिर भी नहीं छोड़ा फर्ज: घायल कैप्टन मछार ने अंदर से खोला कॉकपिट का दरवाजा

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दुबई से तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के विमान में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मछार पर चाकू से हमला कर दिया।

गंभीर रूप से घायल होने और काफी खून बहने के बावजूद कैप्टन मछार ने अपना संयम बनाए रखा और ऐसी स्थिति में भी विमान में मौजूद लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।

हमले के बाद कैप्टन मछार ने कॉकपिट के इमरजेंसी रिलीज मैकेनिज्म को सक्रिय किया और अंदर से दरवाजा अनलॉक करने में कामयाब रहे। इसके चलते दो अन्य पायलट और कुछ लोग कॉकपिट में पहुंच सके और हमलावर को काबू में किया जा सका। इसी दौरान कैप्टन ने आपातकालीन सिग्नल भेजने और केबिन क्रू से संपर्क बनाए रखने में भी सफलता हासिल की।

स्पाइसजेट के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अजय सिंह ने कॉकपिट के दरवाजे की सुरक्षा व्यवस्था को समझाते हुए बताया कि बाहर से कोड डालने के बावजूद दरवाजा सामान्य रूप से नहीं खुलता। इसे अंदर से पायलट को अनलॉक करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इस विमान में अनलॉक करने का मैकेनिज्म को-पायलट की तरफ था, जबकि उसी समय को-पायलट कैप्टन मछार पर हमला कर रहा था।

इसके बावजूद कैप्टन मछार ने किसी तरह अपना हाथ वहां तक पहुंचाया और दरवाजा खोलने की प्रक्रिया पूरी की। इस कदम ने दूसरे लोगों को कॉकपिट में पहुंचने और हमलावर को काबू करने का मौका दिया।

अजय सिंह ने कहा कि कैप्टन मछार ने संकट की घड़ी में अपने कर्तव्य को निभाया। उन्होंने कहा कि पायलट की प्राथमिक जिम्मेदारी विमान में सवार यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करना होती है।

हमले के बीच कॉकपिट का दरवाजा खोलना, आपातकालीन प्रक्रिया सक्रिय करना और विमान को सुरक्षित स्थिति में लाने में योगदान देना कैप्टन मछार के सामने मौजूद असाधारण चुनौती को दर्शाता है। गौरतलब है कि फ्लाईदुबई में शामिल होने से पहले कैप्टन स्मित मछार स्पाइसजेट में कार्यरत थे।

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