ईरान की पहल पर ट्रंप का ‘ना’, तेहरान में सुरक्षा अलर्ट और सख्त

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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच Iran ने अमेरिका को नया शांति वार्ता प्रस्ताव भेजा है, लेकिन Donald Trump ने इसे खारिज कर दिया।

ट्रंप ने कहा कि तेहरान ऐसी मांगें कर रहा है, जिन पर सहमत होना संभव नहीं है, हालांकि उन्होंने इन मांगों का विवरण साझा नहीं किया। करीब 40 दिनों के संघर्ष के बाद भले ही अमेरिका और Israel ने ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने का दावा किया हो, लेकिन हालिया घटनाक्रम संकेत देते हैं कि तेहरान तेजी से अपनी ताकत फिर से जुटा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलों में क्षतिग्रस्त ठिकानों से हथियार निकालकर दोबारा तैनात किए जा रहे हैं और ड्रोन व मिसाइल कार्यक्रम को गति दी जा रही है।

होर्मुज स्ट्रेट पर कूटनीतिक दांव

ईरान के प्रस्ताव का केंद्र Strait of Hormuz में समुद्री आवाजाही बहाल करना है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिकी प्रशासन तक पहुंचाया गया। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि यदि अमेरिका आक्रामक रुख छोड़ता है, तो कूटनीतिक रास्ता अपनाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि ईरानी सेना हर स्थिति के लिए तैयार है।

अमेरिका की जवाबी रणनीति

इस बीच US Central Command ने ट्रंप को ईरान पर संभावित सैन्य विकल्पों की जानकारी दी है। इसमें “डार्क ईगल” जैसी हाइपरसोनिक मिसाइल के इस्तेमाल का प्रस्ताव भी शामिल बताया जा रहा है। अमेरिका ने अपने सहयोगी इजरायल को करीब 6500 टन हथियार और सैन्य उपकरण भेजे हैं, जिनमें गोला-बारूद, सैन्य वाहन और अन्य संसाधन शामिल हैं।

तेल बाजार और समुद्री गतिविधि पर असर

तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में गिरावट दर्ज की गई और कीमतें करीब 109 डॉलर प्रति बैरल तक आ गईं। अमेरिकी दावों के अनुसार, होर्मुज क्षेत्र से 45 जहाजों को वापस लौटाया गया है।

तेहरान में एयर डिफेंस सक्रिय

राजधानी Tehran में संदिग्ध ड्रोन और छोटे विमानों की गतिविधि के बाद एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय किया गया। करीब 20 मिनट तक निगरानी और उन्हें निष्क्रिय करने की कोशिश चली, हालांकि किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।

आगे क्या?

अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान युद्धविराम के दौरान अपनी सैन्य क्षमता तेजी से बढ़ा रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी टकराव की स्थिति में तुरंत जवाब दे सके।

वहीं, ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि स्थिति पूरी तरह शांत नहीं हुई है और जरूरत पड़ने पर अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

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