ईरान ने खोला नया मोर्चा, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी बेस निशाने पर

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अमेरिका-ईरान टकराव और गहरा, खाड़ी देशों में मिसाइल अलर्ट; कई शहरों में धमाके, तेल बाजार में उछाल

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार तड़के अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर नए हवाई हमले किए, जिसके बाद कुवैत, बहरीन और कतर में मिसाइल हमले की आशंका के चलते अलर्ट सायरन बजा दिए गए। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक तीनों देशों में किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

इससे पहले बुधवार को भी अमेरिकी सेना ने ईरान के ठिकानों को निशाना बनाया था। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने बहरीन और कुवैत की दिशा में मिसाइलें और ड्रोन दागे। कुवैती सेना का दावा है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली अधिकांश मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही मार गिरा रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक शेयर बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है।

ईरान के कई इलाकों में धमाके

ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार बुशहर, चाबहार, कोनारक, बंदर अब्बास और सिरिक समेत कई शहरों में विस्फोट हुए हैं। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान अपने हमले नहीं रोकता है तो उसके बिजली संयंत्रों और समुद्री जल को मीठा बनाने वाले संयंत्रों को भी निशाना बनाया जा सकता है। ट्रंप ने खार्ग द्वीप को लेकर भी सख्त चेतावनी दोहराई।

होर्मुज में टैंकर हमले के बाद भड़का विवाद

मंगलवार को ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तीन तेल टैंकरों पर हमला किया था। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले किए। इसके बाद ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन से जवाबी कार्रवाई की। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी हमला टैंकरों पर हुए हमले का जवाब था और चेतावनी दी कि यदि ऐसी घटनाएं दोबारा हुईं तो अमेरिका और अधिक कड़ी कार्रवाई करेगा।

‘अंतरिम समझौता खत्म’ : ट्रंप

बुधवार को ट्रंप ने कहा कि युद्ध रोकने के लिए हुआ अंतरिम समझौता अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि बातचीत की संभावना अभी भी बनी हुई है, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि ईरान गंभीरता से आगे बढ़ रहा है। ट्रंप के इस बयान के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।

ईरान का जवाब

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने ट्रंप के बयान को खारिज करते हुए कहा कि यह अमेरिका की ताकत नहीं, बल्कि ईरान के प्रति उसकी नीति की विफलता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि दबाव और धमकियों के बावजूद ईरान अपने राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगा।

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