अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा है कि ईरान के खिलाफ चलाया गया बड़ा सैन्य अभियान अब समाप्त हो चुका है।
उनके अनुसार 28 फरवरी को अमेरिका और Israel की ओर से शुरू किया गया ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ अपने उद्देश्यों को पूरा करने के बाद खत्म कर दिया गया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान रुबियो ने कहा कि अमेरिका किसी नए युद्ध में नहीं पड़ना चाहता और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देता है।
रुबियो ने संकेत दिया कि स्थायी शांति के लिए Iran को Donald Trump की परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी शर्तों पर सहमति देनी होगी और Strait of Hormuz को फिर से खोलना होगा। उन्होंने हालिया सैन्य कार्रवाई को “रक्षात्मक कदम” बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल अमेरिकी हितों की सुरक्षा था।
होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय वैश्विक चिंता का बड़ा केंद्र बना हुआ है। यह दुनिया के प्रमुख तेल और गैस मार्गों में शामिल है, और इसके बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। अमेरिका इस मार्ग को जल्द से जल्द खोलने के प्रयास में है ताकि फंसे जहाजों को सुरक्षित निकाला जा सके।
अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने कहा कि अमेरिका शांतिपूर्ण तरीके से इस संकट का समाधान चाहता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर कार्रवाई के विकल्प भी खुले हैं। फिलहाल कुछ ही जहाज इस रास्ते से निकल पाए हैं, जबकि कई जहाज अब भी खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं।
रुबियो ने बताया कि करीब 23 हजार नाविक इस स्थिति से प्रभावित हैं। उन्होंने Iran पर आरोप लगाया कि वह इस मार्ग को बाधित कर वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंचा रहा है। इस बीच China सहित अन्य देशों की भूमिका पर भी नजर है। अमेरिका को उम्मीद है कि चीन, ईरान पर दबाव बनाकर इस संकट को कम करने में मदद करेगा, क्योंकि इसका असर उसकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
हालांकि संघर्षविराम जारी है, लेकिन हालात पूरी तरह साफ नहीं हैं। United Arab Emirates ने ईरान पर हमलों के आरोप लगाए हैं, जिन्हें ईरान ने खारिज किया है। ऐसे में सैन्य अभियान भले खत्म हो गया हो, लेकिन क्षेत्रीय तनाव अभी भी बरकरार है।
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