नेपाल में जलप्रलय की असली वजह क्या? USGS ने भूकंप नहीं, ग्लेशियर टूटने को बताया कारण

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नेपाल में जलप्रलय की वजह पर बड़ा खुलासा, USGS बोला- भूकंप नहीं, ग्लेशियर ढहने से मची तबाही

नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने रसुवा जिले और आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचाई है। 160 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 133 भारतीयों समेत सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस बीच अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने बाढ़ की वजह को लेकर शुरुआती आकलन में बड़ा बदलाव किया है।

जिस घटना को भूकंप समझा गया, वह कुछ और निकली

USGS ने बताया कि नेपाल-चीन सीमा के पास बुधवार सुबह दर्ज की गई घटना को शुरुआत में 4.4 तीव्रता का भूकंप माना गया था। बाद के विश्लेषण में एजेंसी ने स्पष्ट किया कि वहां कोई भूकंप नहीं आया था। शुरुआती भूकंपीय संकेत वास्तव में ग्लेशियर के ढहने और मलबे के तेज बहाव से जुड़ी घटना के थे।

सैटेलाइट तस्वीरों के शुरुआती विश्लेषण में भी नेपाल-चीन सीमा पर रसुवागढ़ी से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में लेंडे नदी क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों के खिसकने के संकेत मिले। इससे नदी में बड़ी मात्रा में मलबा पहुंचा और अचानक तेज बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई।

कैसे मची इतनी बड़ी तबाही?

लेंडे नदी, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है और चीन से नेपाल की ओर बहती है। ग्लेशियर के ढहने के साथ चट्टानों और बर्फ का भारी मलबा नदी में गिरा, जिससे पानी का बहाव अचानक बेहद तेज हो गया। इसके बाद बाढ़ और मलबा निचले इलाकों की ओर तेजी से बढ़ा और रास्ते में आने वाले पुलों, सड़कों, वाहनों और इमारतों को अपनी चपेट में ले लिया।

शुरुआत में इस घटना को 4.4 तीव्रता के भूकंप के रूप में रिपोर्ट किया गया था। बाद में USGS के संशोधित आकलन ने इस संभावना को खारिज कर दिया और घटना को ग्लेशियर तथा मलबे के ढहने से जोड़ दिया।

राहत और बचाव अभियान जारी

बाढ़ के बाद रसुवा समेत प्रभावित इलाकों में नेपाली सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा बल राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं। नेपाल पुलिस ने अब तक 160 शव बरामद किए हैं। बाढ़ के खतरे वाले क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

आपदा के बाद बड़ी संख्या में पर्यटक भी संपर्क से बाहर हो गए। नेपाल के पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, कम से कम 403 पर्यटकों के लापता होने की सूचना मिली थी, जिनमें 341 विदेशी नागरिक शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में लापता लोगों की तलाश जारी है।

USGS के नए आकलन के बाद नेपाल की इस त्रासदी में भूकंप के बजाय ग्लेशियर के ढहने, भूस्खलन और मलबे के अचानक नदी में आने को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

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