भारतीय राजनीति में नीतीश कुमार को ऐसे नेता के रूप में याद किया जाता है
जिन्होंने लंबे समय तक सत्ता में रहते हुए बिहार में कई बड़े बदलावों की नींव रखी। 2005 में सत्ता संभालने के बाद उन्होंने जिन क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा असर डाला, उनमें तीन काम खास तौर पर उनकी पहचान बन गए।
जीविका समूह का गठन भी नीतीश सरकार का एक अहम निर्णय रहा है. कम पढ़ी लिखी महिलाएं भी जीविका समूह से जुड़कर आपस में लेन देन कर छोटे मोटे रोजगार करने लगी.इसका भी समाज में व्यापक असर देखने को मिला.रोजगार सृजन के लिए जीविका से जुड़े महिलाओं को 10-10 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान की गई. रोजगार को आगे बढ़ाने वाली महिलाओं को दो लाख रुपए तक लोन दिए जाने की व्यवस्था की गई है.
1. कानून-व्यवस्था में सुधार
नीतीश कुमार के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि बिहार में कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाना माना जाता है। एक समय अपराध, अपहरण और जातीय हिंसा के लिए बदनाम रहे राज्य में ‘स्पीडी ट्रायल’ के जरिए अपराधियों पर तेजी से कार्रवाई हुई। बड़े-बड़े बाहुबली और अपराधी जेल भेजे गए, जिससे आम लोगों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ा और राज्य की छवि सुधरी।
2. सड़क और बुनियादी ढांचे का विस्तार
सड़कों की खराब हालत कभी बिहार की बड़ी समस्या थी, लेकिन नीतीश सरकार के दौरान बड़े पैमाने पर सड़क, पुल और पुलिया का निर्माण हुआ। गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ा गया और आवागमन आसान हुआ। इससे न सिर्फ लोगों की जिंदगी में सुविधा आई, बल्कि व्यापार और रोजगार के अवसर भी बढ़े।
3. महिला सशक्तिकरण की पहल
महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए नीतीश कुमार ने कई अहम फैसले लिए। पंचायत और नगर निकायों में 50% आरक्षण से बड़ी संख्या में महिलाएं नेतृत्व में आईं। साइकिल योजना, छात्रवृत्ति और शिक्षा से जुड़ी योजनाओं ने लड़कियों की पढ़ाई को बढ़ावा दिया। इसके अलावा सरकारी नौकरियों में आरक्षण से उनकी आर्थिक भागीदारी भी बढ़ी।
बाकी क्षेत्रों में भी दिखा असर
बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में भी कई सुधार हुए। हालांकि उद्योग, रोजगार और निवेश के मोर्चे पर अपेक्षित प्रगति अब भी चुनौती बनी हुई है।
स्वास्थ के क्षेत्र में भी कई कदम उठाए गए हैं.ज्यादातर स्वास्थ केंद्र भूतबंगला की श्रेणी में था, लेकिन नए नए भवनों के निर्माण से तस्वीर बदल गई है.पंचायत स्तर पर स्वास्थ व्यवस्था को सुधार करने के प्रयास किए गए हैं.यही नहीं, पटना में पीएमसीएच में 5000 बेड का नया भवन बनाया गया है. प्रत्येक जिले के सदर अस्पताल को दुरुस्त किया गया है. जरूरी दवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं. प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज की घोषणा की गई है. कई जिलों में निर्माण कार्य शुरू हो गया है. हालांकि चिकित्सकों की अपेक्षित संख्या की कमी महसूस की जाती रही है.
कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति और विकास की कहानी में नीतीश कुमार का नाम इन तीन बड़े बदलावों—कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचा और महिला सशक्तिकरण—के लिए हमेशा प्रमुखता से लिया जाएगा।
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