नेपाल में झुग्गी बस्तियों पर चल रहे बुलडोजर अभियान को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है।
विपक्षी दलों ने सरकार पर गरीब और भूमिहीन लोगों को बिना पुनर्वास के उजाड़ने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई से हजारों परिवार अचानक बेघर हो गए हैं। पिछले दो सप्ताह में काठमांडू समेत कई इलाकों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया गया। इस दौरान 15 हजार से अधिक भूमिहीन लोगों को हटाया गया, जबकि करीब चार हजार अस्थायी घरों और झुग्गियों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया।
सरकार का कहना है कि जिन बस्तियों को हटाया गया, वे सार्वजनिक जमीन और नदी किनारे अवैध रूप से बनाई गई थीं। प्रशासन के मुताबिक शहरों में अतिक्रमण हटाने और नदी क्षेत्रों को सुरक्षित करने के लिए यह अभियान जरूरी है। सोमवार को संसद के बजट सत्र में भी यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। विपक्षी दलों ने सरकार पर मानवीय संवेदनाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। विपक्ष के मुख्य सचेतकों ने पहले संसद अध्यक्ष से मुलाकात कर मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी की सांसद Khushbu Oli ने कहा कि भूमिहीन लोगों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था दिए बेदखल करना अन्यायपूर्ण है। वहीं नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद Yubaraj Dulal ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने लोगों को समय पर सूचना दिए बिना बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी।
विपक्षी दलों ने सरकार से पुनर्वास नीति स्पष्ट करने और प्रभावित परिवारों के लिए राहत व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। हालांकि सरकार ने संकेत दिए हैं कि सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।
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