NEET UG-2026 फर्जीवाड़ा: 30 आरोपियों को आज 72 घंटे की रिमांड पर ले जाएगी EOU, मास्टरमाइंड से लेकर पूरे नेटवर्क पर फोकस
NEET UG-2026 परीक्षा फर्जीवाड़ा मामले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) गुरुवार को लखीसराय मंडल कारा में बंद सभी 30 आरोपियों को 72 घंटे की रिमांड पर लेकर पटना जाएगी। माना जा रहा है कि इस पूछताछ से फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क, उसके मास्टरमाइंड और आर्थिक लेन-देन से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।
लखीसराय के किऊल और कबैया थानों में दर्ज तीनों मामलों में अदालत से रिमांड की अनुमति मिलने के बाद EOU ने पूछताछ की पूरी रणनीति तैयार कर ली है। बुधवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने किऊल और कबैया थाने में दर्ज दो मामलों में भी रिमांड की मंजूरी दे दी। इससे पहले एक अन्य मामले में एजेंसी को अनुमति मिल चुकी थी। अब सभी 30 आरोपियों से एक साथ पूछताछ का रास्ता साफ हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, पटना पहुंचने के बाद सभी आरोपियों से पहले अलग-अलग पूछताछ होगी, ताकि उनके बयानों का स्वतंत्र रूप से विश्लेषण किया जा सके। इसके बाद जरूरत पड़ने पर आमने-सामने बैठाकर भी पूछताछ की जाएगी। पूरी प्रक्रिया के दौरान EOU के वरिष्ठ अधिकारी और तीनों मामलों के जांच अधिकारी मौजूद रहेंगे।
जांच एजेंसी आरोपियों के बयानों का मिलान डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों से करेगी। इसके लिए जब्त मोबाइल फोन, लैपटॉप, बायोमेट्रिक डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), बैंक खातों के लेन-देन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की बारीकी से जांच की जाएगी।
EOU की जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि अभ्यर्थियों, साल्वरों, बिचौलियों और रैकेट के संचालकों के बीच संपर्क कैसे स्थापित हुआ और परीक्षा में फर्जीवाड़े को किस तरह अंजाम दिया गया।
रिमांड के दौरान फरार मास्टरमाइंड रविशंकर उर्फ सम्राट और प्रमोद कुमार यादव से जुड़े इनपुट, पैसों के लेन-देन, अन्य साल्वरों की भूमिका, बायोमेट्रिक गड़बड़ी और परीक्षा केंद्रों पर संभावित मिलीभगत जैसे पहलुओं पर भी गहन पूछताछ की जाएगी।
जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर EOU की कार्रवाई का दायरा बिहार से बाहर अन्य राज्यों तक भी बढ़ सकता है। अधिकारियों का मानना है कि 72 घंटे की यह रिमांड पूरे फर्जीवाड़े की परतें खोलने में अहम साबित होगी और इसके आधार पर जल्द ही कुछ और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
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