डिजिटल अरेस्ट और एआई से तैयार किए गए डीपफेक पर सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता जल्द साफ हो सकता है।
केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि संसद के मौजूदा सत्र में एक विधेयक पेश किए जाने की संभावना है, जिसमें डिजिटल अरेस्ट और डीपफेक को अलग-अलग आपराधिक अपराध के रूप में परिभाषित किया जाएगा। प्रस्तावित कानून में इन अपराधों के लिए विशेष दंड का भी प्रावधान किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मौजूदा कानूनों में इन नए साइबर अपराधों की स्पष्ट परिभाषा नहीं है। इसलिए सरकार ऐसा कानूनी ढांचा तैयार कर रही है, जिससे डिजिटल अरेस्ट और एआई आधारित डीपफेक मामलों में प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी बढ़ती घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में आरोपियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है और कई मामलों में जमानत भी नहीं दी गई, लेकिन मौजूदा आपराधिक कानूनों में ‘डिजिटल अरेस्ट’ को अलग अपराध के रूप में परिभाषित नहीं किया गया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से पूछा कि जब डिजिटल अरेस्ट के मामलों में जबरन वसूली, धोखाधड़ी और संगठित अपराध जैसे तत्व शामिल होते हैं, तो क्या इसे अलग अपराध घोषित कर आरोपियों की संपत्ति जब्त करने जैसे कड़े प्रावधान किए जाने चाहिए।
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि एआई आधारित डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल लोगों को गुमराह करने, पहचान की चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए अपराधों को परिभाषित करना या उनके लिए सजा तय करना न्यायपालिका नहीं, बल्कि संसद का अधिकार है।
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि डिजिटल अरेस्ट से निपटने के लिए गठित अंतर-विभागीय समिति लगातार काम कर रही है। उनके अनुसार, विभिन्न एजेंसियों के समन्वित प्रयासों से ऐसे मामलों में कमी आई है और समिति जल्द ही अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी, जिसमें सिस्टम की खामियों और सुधार के सुझाव शामिल होंगे।
गौरतलब है कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बढ़ती साइबर ठगी, विशेषकर बुजुर्गों और सेवानिवृत्त लोगों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था और देशभर में ऐसे मामलों की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा था।
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