भारत में आज 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आगाज होने जा रहा है।
नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के शीर्ष नेता वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बदलती विश्व व्यवस्था से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक दिन पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं।
सम्मेलन के बीच सबसे ज्यादा ध्यान चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के भारत दौरे पर रहेगा। शी शनिवार दोपहर विशेष विमान से दिल्ली के पालम एयरफोर्स स्टेशन पहुंचेंगे। 2019 के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है। ऐसे समय में जब भारत और चीन के संबंध लंबे समय तक तनावपूर्ण रहे हैं, शी की यात्रा को दोनों देशों के बीच रिश्तों में सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
मोदी-शी बैठक से पहले चीन ने दिया बड़ा संदेश
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और शी चिनफिंग की प्रस्तावित मुलाकात से पहले चीन ने भारत के साथ अपने संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। बीजिंग ने कहा है कि दोनों देशों को अपने मतभेदों का उचित समाधान निकालते हुए संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिये से आगे बढ़ाना चाहिए।
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि चीन दोनों नेताओं के बीच बनी रणनीतिक सहमति को लागू करने, संवाद और आदान-प्रदान बढ़ाने तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने के लिए भारत के साथ काम करना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों को मतभेदों को सही तरीके से संभालना चाहिए।
शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री मोदी की ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय वार्ता भी प्रस्तावित है। माओ निंग ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच लगातार तीसरे वर्ष मुलाकात हो रही है। इससे पहले वे कजान और तियानजिन में आमने-सामने बातचीत कर चुके हैं।
चीन बोला- अच्छे पड़ोसी और विकास के साझेदार बनें भारत-चीन
बीजिंग ने भारत और चीन के बीच अच्छे पड़ोसी संबंधों तथा एक-दूसरे के विकास में साझेदार बनने पर भी जोर दिया है। शी चिनफिंग के भारत रवाना होने से पहले चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन के माध्यम से ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई।
शिन्हुआ ने कहा कि ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन विकासशील देशों के बीच सहयोग के महत्वपूर्ण मंच बन चुके हैं। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाला ब्रिक्स सम्मेलन न केवल भारत-चीन संबंधों के लिए, बल्कि ग्लोबल साउथ की बदलती भूमिका और वैश्विक व्यवस्था पर भी महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।
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