दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान नोटिस पाने वाले मतदाताओं की संख्या 31.63 लाख से अधिक हो गई है।
इसी बीच, कुछ प्रमुख लोगों के मामलों के निपटारे के लिए निर्वाचन विभाग के अधिकारियों के उनके आवास पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। दूसरी ओर, आम मतदाताओं को नोटिस का जवाब देने और दस्तावेज जमा कराने के लिए सुनवाई केंद्रों तक जाना पड़ रहा है।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, SIR के तहत करीब 33.13 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने हैं। इनमें से 31,63,930 लोगों को नोटिस जारी हो चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अधिकतर नोटिस उन मामलों में दिए गए हैं जहां मतदाता का नाम पिछली SIR की सूची से मैप नहीं हो पाया। इसके अलावा मतदाता रिकॉर्ड में सामने आई तार्किक विसंगतियां भी नोटिस जारी करने की एक वजह हैं।
कई प्रमुख लोगों को भी जारी हुआ नोटिस
SIR की प्रक्रिया के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनकी पत्नी, पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के परिवार, निर्वाचन आयुक्त एस.एस. संधू, पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और उनकी पत्नी, सांसद बांसुरी स्वराज, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और उनके परिवार तथा CBI निदेशक प्रवीण सूद समेत कई प्रमुख लोगों को नोटिस जारी होने की जानकारी सामने आई।
अधिकारियों को पहले से दिए गए थे विशेष निर्देश
निर्वाचन विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, BLO, AERO और ERO को प्रमुख मतदाताओं के मामलों में रिकॉर्ड की जांच करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए थे। अधिकारियों को यह भी कहा गया था कि जहां संभव हो, नोटिस जारी होने से पहले ही रिकॉर्ड संबंधी समस्या का समाधान किया जाए।
अगर नोटिस जारी करना जरूरी हो, तो संबंधित मतदाता को सिर्फ नोटिस देकर वापस भेजने के बजाय जरूरी दस्तावेजों और प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी देने के निर्देश थे। हालांकि, अधिकारी ने माना कि सभी स्तरों पर इन निर्देशों का एक समान तरीके से पालन नहीं हो सका।
आम मतदाताओं को बार-बार केंद्र जाने से बचाने की कोशिश
निर्वाचन विभाग ने सुनवाई केंद्रों पर तैनात BLO को निर्देश दिया है कि नोटिस पाने वाले मतदाताओं को पहले ही बताया जाए कि उन्हें कौन-कौन से दस्तावेज जमा करने हैं। विभाग का कहना है कि इससे लोगों को अधूरी जानकारी के कारण बार-बार केंद्रों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
अधिकारी के अनुसार, SIR की प्रक्रिया में फील्ड स्तर पर चुनाव कर्मचारियों पर काफी काम का दबाव है। इसी वजह से कुछ स्थानों पर समस्याएं सामने आई हैं। विभाग का प्रयास है कि लंबित नोटिसों का जल्द से जल्द निपटारा किया जाए।
प्रमुख लोगों के मामलों पर दिनभर चली प्रक्रिया
अधिकारियों के अनुसार, सोमवार को कई प्रमुख लोगों को जारी नोटिस से जुड़े मामलों के समाधान की प्रक्रिया दिनभर चली और देर रात तक काम जारी रहा। अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश मामलों की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जबकि रिकॉर्ड और आंकड़ों के मिलान का काम अभी जारी है। संबंधित रिपोर्ट मंगलवार को जारी किए जाने की संभावना जताई गई है।
SIR के तहत नोटिस मिलना अपने आप में मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का अंतिम निर्णय नहीं है। संबंधित मतदाता को अपने दस्तावेज और दावे प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाता है, जिसके बाद रिकॉर्ड की जांच की जाती है।
इन वजहों से जारी हो रहे नोटिस
- पिछले एसआइआर की सूची से नाम का मिलान नहीं होना
- माता-पिता के नाम में अंतर
- मतदाता के नाम में अंतर
- बच्चे के जन्म और माता-पिता की उम्र के बीच नौ माह से कम का अंतर
- माता-पिता की उम्र में 15 वर्ष से कम का अंतर
- छह या उससे अधिक संतान
- माता-पिता की उम्र में 50 वर्ष से अधिक का अंतर
- दादा-दादी की उम्र में 40 वर्ष से कम का अंतर
- माता-पिता का पिछले एसआइआर में अयोग्य पाया जाना
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