अयोध्या चढ़ावा चोरी केस में चार्जशीट दाखिल, ट्रस्ट को राहत; चंपतराय, अनिल मिश्र और गोपाल राव सरकारी गवाह
श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने जेल में बंद आठ आरोपितों के खिलाफ अदालत में 73,480 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया है।
90 दिन की समयसीमा पूरी होने के बाद बुधवार को बाराबंकी के एएसपी रितेश कुमार सिंह और विवेचक सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी चार बड़े बक्सों में चार्जशीट लेकर न्यायालय पहुंचे।
पुलिस की जांच में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के चलते मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और संबंधित बैंक को आरोपों से बाहर रखा गया है। वहीं, पूर्व महासचिव चंपतराय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और मंदिर के पूर्व व्यवस्था प्रमुख गोपाल राव को सरकारी गवाह बनाया गया है। पुलिस ने मंदिर से कीमती आभूषण गायब होने की बात से भी इनकार किया है।
सीसीटीवी में चोरी की 105 घटनाओं का जिक्र
चार्जशीट के 59 पन्नों में मामले के प्रमुख बिंदुओं को दर्ज किया गया है, जबकि बाकी दस्तावेजों में विवेचना से जुड़े साक्ष्य, आरोपितों और गवाहों के बयान शामिल हैं।
जांच में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चोरी से संबंधित 105 घटनाओं का उल्लेख किया गया है। पुलिस ने 173 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। इसके अलावा सर्विलांस के जरिए आरोपितों के बीच हुई करीब 3,300 मैसेज की जानकारी भी जुटाई गई है।
25 जून को ट्रस्ट सदस्य कृष्णमोहन की तहरीर और एसआईटी की संस्तुति के बाद रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल और सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
अनुकल्प को बताया गया मुख्य साजिशकर्ता
पुलिस ने चार्जशीट में अनुकल्प मिश्र को कथित तौर पर मुख्य साजिशकर्ता बताया है। आरोप है कि वह अन्य लोगों से चोरी करवाता था और चोरी की रकम का बंटवारा जनौरा के पास हाईवे के किनारे स्थित एक बाग में किया जाता था।
जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि अनुकल्प ने अपने बहनोई लवकुश को मंदिर में नौकरी दिलाई थी। वहीं, चंपतराय के चालक टिन्नू के पास बिना किसी आदेश के दानपात्रों की चाबियां होने का उल्लेख भी चार्जशीट में किया गया है।
पुलिस के अनुसार, टिन्नू श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के नाम पर पैसे लेता था। साथ ही वह वाहनों को किराये पर चलवाता था, जिससे उसे करीब 90 हजार रुपये महीने की आय होती थी।
किन धाराओं में दर्ज है मुकदमा?
एफआईआर में आपराधिक न्यासभंग, चोरी की संपत्ति रखने या उसके निस्तारण में मदद करने, आपराधिक साजिश और साझा मंशा से अपराध करने से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।
धारा 316(5) सौंपी गई धनराशि या संपत्ति के कथित गबन अथवा दुरुपयोग से संबंधित है। इसमें आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। धारा 317(4) और 317(5) चोरी या गबन की संपत्ति को जानबूझकर रखने, छिपाने या उसके निस्तारण में मदद करने से जुड़ी हैं।
वहीं, धारा 61 आपराधिक साजिश और धारा 3(5) साझा मंशा के तहत सामूहिक आपराधिक जिम्मेदारी से संबंधित है। चार्जशीट में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर होगा।
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