यूरोप में युवाओं का गुस्सा सड़कों पर फूटा, फ्रांस में प्रदर्शन और जर्मनी में आगजनी-लूटपाट से तनाव बढ़ा

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यूरोप में युवाओं का विद्रोह तेज, फ्रांस में 3.20 लाख लोगों ने किया प्रदर्शन; जर्मनी में दुकानों की लूट और पुलिस से झड़प

यूरोप के कई देशों में युवा महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था और सरकारी नीतियों के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं। फ्रांस से लेकर जर्मनी, पुर्तगाल और नीदरलैंड तक विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला तेज हो गया है। फ्रांस में लगातार तीसरे शनिवार हजारों लोग सड़कों पर उतरे। दूसरी ओर, जर्मनी के कई शहरों में प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। फ्रैंकफर्ट में उपद्रवियों ने दुकानों में तोड़फोड़ की और लूटपाट को अंजाम दिया। एक हथियार की दुकान से बंदूकें भी उठा ली गईं।

फ्रांस में 3.20 लाख लोगों ने जताया विरोध
समाचार एजेंसी AP के अनुसार, फ्रांस में हैलोवीन के दौरान कई प्रदर्शनकारी डरावनी पोशाकें पहनकर सड़कों पर पहुंचे। पुलिस ने आशंका जताई थी कि ऐसी पोशाकों की वजह से हिंसा करने वालों की पहचान करना मुश्किल हो सकता है।

सरकार के मुताबिक, देशभर में करीब 3.20 लाख लोगों ने विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए गृह मंत्री लारेंट नुनेज के निर्देश पर 70 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे। प्रमुख शहरों में हेलीकॉप्टर से भी निगरानी की गई।

प्रदर्शन में छात्र, मजदूर संगठन, जलवायु कार्यकर्ता और महंगाई से परेशान नागरिक शामिल हुए। लोगों ने राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रों की नीतियों के खिलाफ भी नारेबाजी की।

हालांकि, पिछले दो सप्ताह की तुलना में प्रदर्शन काफी हद तक शांतिपूर्ण रहे, लेकिन देर शाम कुछ जगहों पर स्थिति बिगड़ गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बोतलें और पटाखे फेंके। इसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। देर रात तक 560 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की सूचना थी।

जर्मनी में 30 शहरों में आंदोलन, 17 दुकानों में तोड़फोड़
जर्मनी में ‘जेन-जी रीगेल्ट’ यानी ‘जेन-जी संभाल लेंगे’ अभियान के तहत करीब 30 शहरों में प्रदर्शन आयोजित किए गए। युवाओं ने बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं, जलवायु संरक्षण तथा सस्ता जीवनयापन सुनिश्चित करने की मांग उठाई। इसके साथ ही अनिवार्य सैन्य सेवा की वापसी का विरोध भी किया।

रॉयटर्स के मुताबिक, फ्रैंकफर्ट में प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठी। उपद्रवियों ने 17 दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की। एक बंदूक की दुकान से कई हथियार भी चोरी कर लिए गए, जिन्हें पुलिस ने बाद में जब्त करने का दावा किया।

हिंसा में 100 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। कोलोन और हैम्बर्ग में भी प्रदर्शनकारियों ने पटाखे, पत्थर और पेट्रोल बम फेंके। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस ने पानी की बौछार और आंसू गैस का सहारा लिया।

लिस्बन और नीदरलैंड में भी प्रदर्शन
पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में भी हजारों लोग अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे। प्रदर्शन समाप्त होने के बाद पुलिस ने रोसियो स्क्वायर में लगाए गए 50 से अधिक टेंट हटा दिए। इस कार्रवाई के दौरान लाठीचार्ज और गिरफ्तारियों की खबरें भी आईं।

वहीं, नीदरलैंड में हजारों युवाओं ने विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि, पुलिस की निगरानी के बीच अधिकांश जगहों पर आंदोलन शांतिपूर्ण रहा।

यूरोप में लगातार बढ़ रहे इन आंदोलनों में युवाओं की प्रमुख मांगें रोजगार के अवसर, बेहतर शिक्षा, सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं, महंगाई से राहत और पर्यावरण संरक्षण हैं। अलग-अलग देशों में विरोध का तरीका भले ही अलग रहा हो, लेकिन युवाओं की नाराजगी अब व्यापक आंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है।

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