रोटी के लिए मजबूर अफगान परिवार, गरीबी में बेटियों को बेचने की नौबत

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अफगानिस्तान में बढ़ती गरीबी और भुखमरी ने हजारों परिवारों को गहरे संकट में धकेल दिया है।

आर्थिक बदहाली ऐसी स्थिति में पहुंच चुकी है कि कई परिवार दो वक्त की रोटी, इलाज और कर्ज चुकाने के लिए अपनी छोटी बेटियों की कम उम्र में शादी तय करने या उन्हें दूसरे परिवारों के हवाले करने को मजबूर हो रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक देश की बड़ी आबादी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रही है। खाद्य संकट, बेरोजगारी और अंतरराष्ट्रीय सहायता में कमी के कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। राहत एजेंसियों का अनुमान है कि लाखों लोग भुखमरी जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्टों में सामने आए मामलों के अनुसार कई परिवारों के पास बच्चों के लिए भोजन तक जुटाना मुश्किल हो गया है। घोर प्रांत के एक पिता ने बताया कि आर्थिक तंगी और भारी कर्ज के कारण वह अपनी छोटी बेटी का भविष्य किसी दूसरे परिवार के साथ तय करने पर मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि काम न मिलने और लगातार बढ़ती परेशानियों ने उन्हें पूरी तरह बेबस कर दिया है।

एक अन्य परिवार ने बेटी के इलाज के लिए रिश्तेदारों से आर्थिक मदद ली। बदले में बच्ची की भविष्य में शादी उसी परिवार में तय करने की बात हुई। ऐसे मामलों को स्थानीय लोग गरीबी और मजबूरी का सबसे दर्दनाक चेहरा बता रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि तालिबान शासन के बाद महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा तथा रोजगार पर लगी पाबंदियों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। परिवारों की आय घटने और सामाजिक असमानता बढ़ने से लड़कियां सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं।

मानवीय संगठनों के अनुसार कुछ साल पहले तक लाखों अफगान परिवारों को खाद्यान्न और जरूरी सहायता मिल रही थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मदद में कटौती के बाद संकट तेजी से गहराया है। संयुक्त राष्ट्र और कई राहत एजेंसियों ने दुनिया के देशों से अफगानिस्तान के लिए मानवीय सहायता बढ़ाने की अपील की है, ताकि भूख और गरीबी से जूझ रहे लोगों को राहत मिल सके।

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