संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा पर आयोजित वार्षिक खुली बहस के दौरान भारत ने पाकिस्तान को आतंकवाद और सीमा पार हिंसा के मुद्दे पर कड़ा जवाब दिया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि Harish P ने कहा कि आतंकवाद दुनिया भर में नागरिकों के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है और ऐसे देशों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए जो आतंकवाद को समर्थन या शरण देते हैं।
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि संघर्ष के दौरान नागरिकों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने का अहम हिस्सा है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में 2025 में नागरिक मौतों के आंकड़ों में कुछ कमी आई है, लेकिन दुनिया भर में जारी संघर्षों में हजारों लोग अब भी प्रभावित हो रहे हैं।
भारत ने युद्धग्रस्त इलाकों में अस्पतालों, स्कूलों और आम नागरिकों पर बढ़ते हमलों पर भी चिंता जताई। भारतीय दूत ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में ड्रोन, मिसाइल और अन्य विस्फोटक हथियारों का बढ़ता इस्तेमाल मानवीय संकट को और गंभीर बना रहा है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई सैन्य तकनीकों के उपयोग को अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के अनुरूप रखने की जरूरत बताई।
बहस के दौरान पाकिस्तान द्वारा भारत के आंतरिक मामलों का उल्लेख किए जाने पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान का रिकॉर्ड खुद हिंसा, आतंकवाद और मानवाधिकार उल्लंघनों से जुड़ा रहा है। उन्होंने अफगानिस्तान में नागरिकों पर पड़ रहे प्रभाव और सीमा पार हिंसा को लेकर संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन की रिपोर्टों का भी जिक्र किया।
भारत ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में नागरिकों को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं हो सकता। भारतीय प्रतिनिधि ने वैश्विक समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट कार्रवाई करने और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
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