पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान भले ही शांतिपूर्ण ढंग से पूरा हो गया, लेकिन मालदा जिले के कुछ गांवों में कई मतदाता अपने मताधिकार से वंचित रह गए।
मतदाता सूची से नाम गायब होने के कारण बड़ी संख्या में लोग वोट नहीं डाल सके, जिससे कई जगहों पर मायूसी का माहौल रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, मोथाबाड़ी गांव में मतदान के दिन सैकड़ों लोग ऐसे थे, जिनके नाम सूची में नहीं थे। इनमें कई ऐसे भी थे, जिन्होंने पिछले चुनावों में मतदान किया था। इस वजह से लोगों में भ्रम और नाराजगी दोनों देखने को मिले।
चुनाव के दिन गांव में सबसे ज्यादा चर्चा ‘SIR’ को लेकर रही, जिसे लोग अपने नाम हटने की वजह मान रहे थे। जिन लोगों के नाम सूची में थे, उन्होंने मतदान किया, लेकिन बड़ी संख्या में लोग बूथ तक पहुंचकर भी वोट नहीं डाल सके।
अलीनगर के निवासी मतिउर रहमान ने बताया कि उन्होंने अपने सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए थे, इसके बावजूद उनका और उनके परिवार के अन्य सदस्यों का नाम सूची में नहीं मिला। उन्होंने सवाल उठाया कि पहले वोट डालने के बावजूद इस बार उन्हें क्यों रोका गया।
सरदारपारा इलाके की महिलाओं ने भी इसी तरह की शिकायत की। उनका कहना था कि उन्होंने कई चुनावों में वोट दिया है, लेकिन इस बार उनके पहचान पत्र को मान्य नहीं माना गया। महीनों तक प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी वे मतदान से वंचित रह गईं।
महालदारटोला के 60 वर्षीय दिलीप एसके ने भी हैरानी जताई कि उनका नाम सूची में नहीं है, जबकि उनके बेटे का नाम दर्ज है। उनका कहना था कि पहले उनके नाम के आधार पर ही परिवार के अन्य सदस्यों का पंजीकरण हुआ था।
इन घटनाओं ने मतदाता सूची के प्रबंधन और सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रभावित लोग अब उम्मीद कर रहे हैं कि अगली बार उन्हें बिना किसी बाधा के मतदान का अधिकार मिल सकेगा।
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