देशभर में बढ़ती गर्मी के साथ ही हीटस्ट्रोक के मामलों ने चिंता बढ़ा दी है।
दक्षिण भारत के Andhra Pradesh में मार्च से मई के बीच 300 से ज्यादा संदिग्ध हीटस्ट्रोक केस दर्ज किए गए हैं। राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 1 मार्च से 19 मई तक कुल 325 संदिग्ध मामले सामने आए, जिनमें से बड़ी संख्या मई के शुरुआती दिनों में दर्ज हुई।
हीटस्ट्रोक अत्यधिक गर्मी के कारण शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ जाने से होता है। इसके लक्षणों में चक्कर आना, उल्टी, भ्रम की स्थिति, बेहोशी और दौरे पड़ना शामिल हैं। गंभीर मामलों में शरीर के अंग काम करना बंद कर सकते हैं, जिससे मरीज की जान भी जा सकती है।
बढ़ते तापमान को देखते हुए आंध्र प्रदेश प्रशासन ने लोगों को सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि इसी दौरान लू और अत्यधिक गर्मी का असर सबसे ज्यादा रहता है।
इस बीच Delhi समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में भी हीटवेव का खतरा बढ़ गया है। भारतीय मौसम विभाग ने 22 से 27 मई के बीच गंभीर हीटवेव की चेतावनी जारी की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल में हीटस्ट्रोक के दो मरीज गंभीर हालत में भर्ती हैं।
तेज गर्मी का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखने लगा है। कई राज्यों में डायरिया और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जबकि Gujarat के कुछ इलाकों में पानी की किल्लत की समस्या भी सामने आई है।
मौसम विभाग के अनुसार, मैदानी क्षेत्रों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होने और सामान्य से 4.5 से 6.4 डिग्री ज्यादा रहने पर हीटवेव घोषित की जाती है। तापमान 45 डिग्री के पार पहुंचने पर स्थिति गंभीर मानी जाती है।
स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल अब तक सबसे अधिक तापमान Banda में दर्ज किया गया, जहां पारा 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। पिछले साल मार्च से जून के बीच देश में 7,000 से ज्यादा संदिग्ध हीटस्ट्रोक मामले और 14 मौतें दर्ज हुई थीं, जबकि 2024 की समान अवधि में 40,000 से अधिक मामले और 110 मौतें सामने आई थीं।
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