बिहार में अवैध खनन रोकने के लिए हाईटेक प्लान, बॉडी-वॉर्न कैमरों से होगी मॉनिटरिंग

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बिहार में अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर लगाम कसने के लिए खान एवं भू-तत्व विभाग अब तकनीक का सहारा लेने जा रहा है।

विभाग जांच और छापेमारी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बॉडी-वॉर्न कैमरे, लाइव वीडियोग्राफी और डिजिटल साक्ष्य आधारित निगरानी तंत्र लागू करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार हाल ही में विभाग के सहायक निदेशक आनंद प्रकाश के नेतृत्व में अधिकारियों के साथ बैठक हुई, जिसमें अवैध खनन, परिवहन और वाहन जब्ती की कार्रवाई को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में सहमति बनी कि छापेमारी के दौरान पुलिस की तर्ज पर टीमों को बॉडी-वॉर्न कैमरों से लैस किया जाए, ताकि पूरी कार्रवाई की लाइव रिकॉर्डिंग हो सके।

विभाग का मानना है कि जांच के दौरान होने वाली हर गतिविधि का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहने से भविष्य में किसी विवाद या आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति में ठोस साक्ष्य उपलब्ध कराए जा सकेंगे। विशेष रूप से बालू, पत्थर और अन्य खनिजों के अवैध परिवहन के दौरान वाहनों की जांच, चालान सत्यापन और जब्ती प्रक्रिया को कैमरों में रिकॉर्ड करने की व्यवस्था की जा रही है।

अधिकारियों के मुताबिक तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था लागू होने से अवैध खनन माफियाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा, कार्रवाई में पारदर्शिता बढ़ेगी और जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता मजबूत होगी। इसके साथ ही फील्ड स्तर पर तैनात अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जा सकेगी।

विभाग इस नई व्यवस्था को लागू करने से पहले पुलिस और परिवहन विभाग में पहले से इस्तेमाल हो रही तकनीकी प्रणालियों का अध्ययन करेगा। साथ ही अन्य राज्यों में अवैध खनन रोकने के लिए अपनाए गए आधुनिक मॉडल और निगरानी तंत्र की भी समीक्षा की जाएगी। मोबाइल आधारित निगरानी, ऑनलाइन डेटा संग्रहण और डिजिटल साक्ष्य प्रबंधन प्रणाली को एकीकृत करने पर भी मंथन चल रहा है।

विभागीय रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025-26 में अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ 50 हजार से अधिक छापेमारी की गई। इस दौरान 2727 से ज्यादा एफआईआर दर्ज हुईं, 700 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया और 6214 वाहन जब्त किए गए। विभाग ने कार्रवाई के तहत 82 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना भी वसूला।

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