होर्मुज संकट ने बढ़ाई ट्रंप की टेंशन, ईरान के परमाणु मुद्दे पर नरम पड़ सकता है अमेरिका

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होर्मुज पर ईरान का बड़ा दांव, अमेरिका के सामने रखीं शर्तें; ट्रंप परमाणु डील टालने को तैयार?
होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों की आवाजाही के लिए फिर से खोलने को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। हालांकि, तेहरान ने साफ कर दिया है कि सिर्फ समझौता हो जाने से होर्मुज से आवाजाही सामान्य नहीं होगी। इसके लिए अमेरिका को ईरान की प्रमुख शर्तों को स्वीकार करना होगा।
ऐसे में अब इस पूरे संकट की अगली चाल अमेरिका के हाथ में आ गई है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज को पूरी तरह खोलने के बदले ईरान के साथ प्रस्तावित परमाणु समझौते को फिलहाल टालने पर विचार कर सकते हैं।
ईरान-ओमान बातचीत अंतिम दौर में
रॉयटर्स के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि होर्मुज को लेकर ईरान और ओमान के बीच समझौते पर बातचीत अंतिम चरण में है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान की अन्य मांगें पूरी होने तक जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं होगी।
मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था के तहत एक अस्थायी समुद्री मार्ग तैयार किया जा सकता है। अमेरिका द्वारा ईरान की शर्तें स्वीकार किए जाने के बाद इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही शुरू हो सकती है।
ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं कई शर्तें
अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से सीधी बातचीत नहीं हुई है। हालांकि, मध्यस्थों के जरिए दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है।
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर जोल्घादर के मुताबिक, होर्मुज खोलने से पहले अमेरिका को ईरान पर लगे प्रतिबंध और नौसैनिक नाकेबंदी हटानी होगी।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान की मांगों में क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य मौजूदगी खत्म करना, युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई और विदेशों में जमा ईरानी संपत्तियों को जारी करना भी शामिल है।
इसके अलावा ईरान ने अपने सहयोगियों के खिलाफ हमले रोकने की मांग भी रखी है। इसमें लेबनान, फलस्तीन, यमन और इराक में ईरान समर्थित समूहों के खिलाफ कार्रवाई रोकने की शर्त शामिल बताई जा रही है।
होर्मुज के बदले परमाणु मुद्दा टाल सकते हैं ट्रंप
एएनआई ने वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि ट्रंप प्रशासन होर्मुज को पूरी तरह खोलने को बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर सकता है। इसके बदले ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक समझौते को फिलहाल टाला जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप पिछले कुछ हफ्तों से इस संभावित विकल्प के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं। उन्होंने अपने वरिष्ठ सहयोगियों को संकेत दिया है कि तेहरान के साथ औपचारिक परमाणु समझौते के बिना भी आगे बढ़ने का विकल्प खुला रखा जा सकता है।
हालांकि, ईरान की व्यापक मांगों को देखते हुए ऐसा समझौता करना दोनों पक्षों के लिए आसान नहीं होगा। घरेलू राजनीति के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस तरह के किसी समझौते को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
लाल सागर में हूतियों का हमला, 7 की मौत
इसी बीच क्षेत्र में तनाव का एक और मोर्चा सामने आया है। ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने रविवार को लाल सागर में सऊदी अरब के महत्वपूर्ण बंदरगाह मोखा को निशाना बनाया।
एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, हमले में चार सैनिकों और तीन नागरिकों की मौत हुई, जबकि 15 लोग घायल हुए। सऊदी अरब की जाजान रिफाइनरी को भी मिसाइल और ड्रोन हमलों से निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।
सऊदी ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, हमले से बंदरगाह, उसकी इमारतों और वहां रखे सामान को नुकसान पहुंचा। रिफाइनरी में लगी आग पर काबू पा लिया गया।
हूती प्रवक्ता याहया सारी ने दावा किया कि दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र की रिफाइनरी को निशाना बनाया गया। उनके मुताबिक, रिफाइनरी में रोजाना करीब चार लाख बैरल कच्चे तेल का शोधन होता है।
मक्का रक्षा समझौते के बाद बढ़ी चिंता
हूतियों के ये हमले सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच हुए त्रिपक्षीय मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के सिर्फ दो दिन बाद हुए हैं।
ऐसे में अब यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर सऊदी अरब पर आगे भी बड़े हमले होते हैं तो इस नए रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान और तुर्किए किस तरह प्रतिक्रिया देंगे। फिलहाल इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
होर्मुज से लेकर लाल सागर तक बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक सौदेबाजी अहम मोड़ पर पहुंच गई है। अब देखना होगा कि ट्रंप प्रशासन होर्मुज खोलने के लिए तेहरान की शर्तों पर कितना झुकता है और परमाणु मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है।

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