रीवा में 10 साल बाद आई भीषण बाढ़, 150 से अधिक गांव डूबे; 2200 लोग राहत शिविरों में पहुंचे

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रीवा में 24 घंटे में 187 मिमी बारिश से बाढ़ जैसे हालात, 400 से ज्यादा गांव प्रभावित

रीवा जिले में पिछले 24 घंटों में हुई 187 मिमी से अधिक बारिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं। लगातार बारिश के कारण जिले की प्रमुख नदियां और नाले उफान पर हैं। ग्रामीण इलाकों के साथ शहरी बस्तियों में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इस मानसून सीजन में जिले में अब तक 426.8 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है।

तेज बारिश के कारण अधिकांश जलाशयों में पानी तेजी से बढ़ा है। बाणसागर को छोड़कर क्षेत्र के कई बांध और जलाशय भर चुके हैं। पानी की निकासी के लिए बीहर नदी के सभी 18 गेट खोल दिए गए हैं। वहीं, बकिया बराज के 14, मेजा के 5 और अंदवा बांध के 4 गेट भी खोले गए हैं।

रायपुर कर्चुलियान, गुढ़ और त्योंथर में सबसे अधिक 120-120 मिमी बारिश दर्ज हुई। मनगवां में 110 मिमी, हुजूर में 105 मिमी और सेमरिया में 85 मिमी बारिश हुई। तराई क्षेत्र में टमस नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब ढाई मीटर ऊपर पहुंच गया है। बेलन नदी और उसकी सहायक नदियां नैना व गोरमा भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। पिछले 24 घंटे में बेलन नदी का जलस्तर करीब साढ़े सात फीट बढ़ा है।

बाढ़ के कारण तराई क्षेत्र की दो दर्जन से अधिक पंचायतों के करीब 50 गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है। रीवा और पड़ोसी मऊगंज जिले के 400 से अधिक गांव प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई कच्चे मकानों के ढहने की भी सूचना है।

प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। अब तक 136 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। वहीं, 2200 से ज्यादा प्रभावित लोगों को 27 राहत शिविरों में ठहराया गया है। निचले इलाकों से लोगों को लगातार सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

बारिश और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचने से कई इलाकों में विद्युत आपूर्ति भी बाधित हुई है। मौसम केंद्र ने अगले पांच दिनों तक रुक-रुककर बारिश जारी रहने का अनुमान जताया है। ऐसे में प्रशासन और आपदा राहत टीमों ने प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।

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