पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच शहबाज शरीफ ने संकेत दिया है कि पाकिस्तान अब सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभाने को तैयार है।
उन्होंने मंगलवार को कहा कि उनका देश अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए “सार्थक और निर्णायक वार्ता” की मेजबानी कर सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्रीय शांति को लेकर मिस्र और तुर्किये के साथ पाकिस्तान के परोक्ष प्रयासों की चर्चा तेज है। शरीफ ने ‘एक्स’ पर लिखा कि उनका देश शांति और स्थिरता के लिए हर संभव कूटनीतिक पहल का समर्थन करता है और यदि दोनों पक्ष तैयार हों तो वार्ता की मेजबानी उसके लिए “सम्मान” की बात होगी।
इस बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तब और तवज्जो मिली जब डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अपने प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर शेयर किया। इससे यह संकेत मिला कि इस पहल को वॉशिंगटन में भी गंभीरता से देखा जा रहा है।
हालांकि, पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने फिलहाल संभावित वार्ता स्थल को लेकर चल रही अटकलों पर सावधानी बरतने को कहा है। इसके बावजूद कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में इस्लामाबाद को संभावित बातचीत के केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।
‘फाइनेंशियल टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने हाल ही में ट्रंप से संपर्क कर मध्यस्थता की पेशकश की है। वहीं CNN के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के सामने अपनी शर्तें रखी हैं और इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका अहम होती जा रही है।
रिपोर्ट्स यह भी संकेत देती हैं कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मलिक बैक-चैनल कूटनीति में सक्रिय हैं और अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ-साथ जेरेड कुशनर से संपर्क में हैं। इससे यह संकेत मिल रहा है कि पर्दे के पीछे बातचीत का दौर तेज हो चुका है।
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