अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के खिलाफ पूरे यूरोप में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।
लंदन में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और हमलों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी रसेल स्क्वायर से व्हाइटहॉल तक मार्च करते हुए बैनर और पोस्टर के साथ आगे बढ़े। “स्टॉप द वार ऑन ईरान” और युद्धविराम की मांग जैसे नारे पूरे मध्य लंदन में गूंजते रहे।
रैली में शामिल लोगों ने तत्काल युद्धविराम और मध्य पूर्व में विदेशी हस्तक्षेप खत्म करने की मांग की। एक प्रदर्शनकारी ने अमेरिकी अभियान की आलोचना करते हुए कहा कि बमबारी से लोकतंत्र नहीं लाया जा सकता। वहीं, बर्मिंघम से आए एक अन्य प्रदर्शनकारी ने इन हमलों को “शर्मनाक” बताते हुए कहा कि इसके असर वैश्विक स्तर पर दिखने लगे हैं, खासकर तेल की कीमतों और सुरक्षा हालात पर।
स्पेन की राजधानी मैड्रिड में भी हजारों लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने एटोचा से पुएर्ता डेल सोल तक मार्च करते हुए “नो टू वॉर” और “स्पेन इज नॉट द यूएस” जैसे नारे लगाए। इस प्रदर्शन में इरेन मोन्टेरो समेत कई राजनीतिक नेता शामिल हुए, जिन्होंने नाटो की नीतियों की आलोचना की।
पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में भी सैकड़ों लोगों ने अमेरिकी दूतावास के पास विरोध प्रदर्शन किया। “यस टू पीस, नो टू वॉर” जैसे नारों के साथ प्रदर्शनकारियों ने निरस्त्रीकरण और शांति की मांग उठाई।
इसी तरह बुल्गारिया की राजधानी सोफिया में भी लोगों ने मार्च निकालकर “नो वॉर अगेंस्ट ईरान” जैसे पोस्टर दिखाए और अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का विरोध किया। इसके अलावा फ्रांस और ग्रीस सहित कई यूरोपीय देशों में भी प्रदर्शन देखने को मिले।
इस बीच, लेडेन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रॉब डेविक ने अमेरिकी कदमों की आलोचना करते हुए इसे “सीधा दबाव” बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे यूरोप की सुरक्षा को खतरा हो सकता है और यूरोपीय देशों को अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बढ़ाने की जरूरत है।
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