भीषण गर्मी का कहर: अफ्रीका में गर्म रेत से झुलस रहे ऊंट, बढ़ रही मौतें

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भीषण गर्मी का कहर: अफ्रीका में तपती रेत और लू से मर रहे ऊंट, जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई चिंता

रेगिस्तान का सबसे सहनशील जीव माने जाने वाले ऊंट भी अब बढ़ती गर्मी के आगे बेबस नजर आ रहे हैं। अफ्रीका के कई हिस्सों में रिकॉर्ड तापमान, तपती रेत और लगातार पड़ रहे सूखे ने ऊंटों के जीवन पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन का असर अब उन जानवरों पर भी साफ दिखाई देने लगा है, जिन्हें कभी अत्यधिक गर्मी सहने की क्षमता के लिए जाना जाता था।

इथियोपिया में गर्मी से दम तोड़ रहे ऊंट

उत्तर-पूर्वी इथियोपिया का अफार क्षेत्र दुनिया के सबसे गर्म इलाकों में गिना जाता है। यहां के ऊंट पालकों का कहना है कि लगातार बढ़ते तापमान ने पशुपालन को मुश्किल बना दिया है।

स्थानीय पशुपालक अली उमर ने बताया कि उनके ऊंटों के पैरों में तपती रेत की वजह से छाले पड़ जाते हैं, आंखों से लगातार पानी निकलता है और गर्म जमीन उनकी खाल तक झुलसा देती है। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में गर्मी के कारण उनके आठ ऊंट के बच्चों की मौत हो चुकी है।

वैज्ञानिकों ने जताई चिंता

विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक गर्मी से ऊंटों में हीट स्ट्रेस, डिहाइड्रेशन, थकान और संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। उत्तर अफ्रीका और हॉर्न ऑफ अफ्रीका में दुनिया के लगभग 80 प्रतिशत ड्रोमेडरी ऊंट पाए जाते हैं, जिन्हें हमेशा से गर्म और शुष्क इलाकों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता रहा है।

हालांकि, हाल के अध्ययनों से पता चला है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऊंटों के स्वास्थ्य, प्रजनन क्षमता और दूध उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

सोमालिया और केन्या में भी गंभीर हालात

सोमालिया में सूखे के कारण ऊंटों की मौत के मामलों में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 46 प्रतिशत पशुपालक परिवार प्रभावित हुए हैं, जबकि कुछ इलाकों में ऊंटों की मृत्यु दर 70 प्रतिशत से अधिक तक पहुंच गई है।

केन्या के पशु चिकित्सकों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में अत्यधिक गर्मी के कारण ऊंटों की मौत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अल्जीरिया में भी लू के दौरान ऊंटों की मौत के मामलों में इजाफा देखा गया है।

आखिर ऊंट भी गर्मी क्यों नहीं झेल पा रहे?

विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंट सामान्य रूप से 40 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान सहन कर सकते हैं। उनका शरीर तापमान को नियंत्रित करने और पसीना कम निकालने की क्षमता रखता है।

लेकिन जब तापमान लगातार 41 से 45 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बना रहता है, तो शरीर की प्राकृतिक ताप नियंत्रण प्रणाली प्रभावित होने लगती है। इससे कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है और जानवरों में कमजोरी, भूख कम लगना, वजन घटना, किडनी संबंधी समस्याएं तथा परजीवी संक्रमण जैसी दिक्कतें बढ़ने लगती हैं।

पलायन को मजबूर हो रहे पशुपालक

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार, हाल के वर्षों में उत्तर अफ्रीका और मध्य पूर्व में तापमान कई बार 50 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया है। बढ़ती गर्मी, पानी की कमी और चरागाहों के खत्म होने के कारण इथियोपिया के कई पशुपालक अब अपने ऊंटों के साथ स्थायी रूप से दूसरे इलाकों की ओर पलायन कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जलवायु परिवर्तन की रफ्तार इसी तरह जारी रही, तो ऊंट पालन पर निर्भर लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। कभी रेगिस्तान की सबसे मजबूत पहचान रहे ऊंट अब खुद बदलते मौसम के सबसे बड़े पीड़ितों में शामिल होते जा रहे हैं।

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