रक्षा क्षेत्र में बड़ी कामयाबी, मल्टीपल वॉरहेड तकनीक से लैस अग्नि मिसाइल का सफल टेस्ट

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भारत ने अपनी रणनीतिक सैन्य क्षमता में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) तकनीक से लैस उन्नत अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण किया है।

रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि यह परीक्षण शुक्रवार को ओडिशा तट के पास डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। इस परीक्षण के जरिए भारत ने एक बार फिर यह दिखाया है कि वह एक ही मिसाइल से कई अलग-अलग रणनीतिक लक्ष्यों पर सटीक हमला करने में सक्षम है। रक्षा विशेषज्ञ इसे भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता के लिए बड़ा कदम मान रहे हैं।

क्या है MIRV तकनीक?

MIRV तकनीक ऐसी प्रणाली है, जिसमें एक बैलिस्टिक मिसाइल कई परमाणु वारहेड लेकर अलग-अलग लक्ष्यों को निशाना बना सकती है। यानी एक मिसाइल लॉन्च होने के बाद उसके अलग-अलग वारहेड स्वतंत्र रूप से तय लक्ष्यों की ओर बढ़ते हैं।

यह तकनीक दुश्मन के मिसाइल रक्षा तंत्र को भेदने में मदद करती है और एक साथ कई रणनीतिक ठिकानों पर हमला करने की क्षमता देती है। इसी वजह से इसे आधुनिक परमाणु प्रतिरोधक रणनीति में बेहद अहम माना जाता है।

हिंद महासागर क्षेत्र में कई लक्ष्यों पर परीक्षण

रक्षा मंत्रालय के अनुसार अग्नि मिसाइल के इस परीक्षण में कई पेलोड का इस्तेमाल किया गया। इनका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में फैले अलग-अलग लक्ष्यों पर सटीक वार करना था। परीक्षण के दौरान मिसाइल के पूरे प्रक्षेपवक्र पर जमीन और समुद्र आधारित ट्रैकिंग सिस्टम से नजर रखी गई।

मंत्रालय ने कहा कि उड़ान से जुड़े सभी आंकड़े सफल रहे और मिशन के सभी उद्देश्य हासिल कर लिए गए।

अग्नि-5 का दूसरा बड़ा परीक्षण

यह MIRV-सक्षम अग्नि-5 मिसाइल का दूसरा प्रमुख परीक्षण माना जा रहा है। इससे पहले मार्च 2024 में ‘मिशन दिव्यास्त्र’ के तहत इसका पहला सफल परीक्षण किया गया था। परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम अग्नि-5 की मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर से अधिक है। इसकी जद में चीन सहित एशिया का बड़ा हिस्सा, यूरोप के कुछ इलाके और अफ्रीका के क्षेत्र आते हैं।

राजनाथ सिंह ने दी बधाई

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता पर DRDO, भारतीय सेना और रक्षा क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की रक्षा तैयारियों को और मजबूत करेगी तथा बदलते सुरक्षा हालात में देश की रणनीतिक क्षमता को नई मजबूती देगी। इस अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली को DRDO की विभिन्न प्रयोगशालाओं ने देशभर के औद्योगिक साझेदारों के सहयोग से विकसित किया है। परीक्षण के दौरान DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिक और भारतीय सेना के अधिकारी भी मौजूद रहे।

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