अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज पहली बार 40 लाख करोड़ डॉलर यानी 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है।
महज एक दशक में देश का कर्ज करीब दोगुना हो गया है। बढ़ते कर्ज के बीच सरकार के ब्याज भुगतान का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है और वह रोजाना करीब 3.80 अरब डॉलर सिर्फ ब्याज में खर्च कर रही है। 2016 में अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज 20 ट्रिलियन डॉलर से नीचे था। 2008 के बाद से इसमें 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की बढ़ोतरी हो चुकी है। मौजूदा स्तर के हिसाब से हर अमेरिकी नागरिक पर औसतन करीब 1,19,699 डॉलर का कर्ज आता है।
पीटर जी. पीटरसन फाउंडेशन के सीईओ माइकल पीटरसन ने चेतावनी दी है कि कर्ज बढ़ने की यही रफ्तार बनी रही तो अमेरिका करीब छह साल में 50 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर सकता है। उनके मुताबिक, यह स्थिति देश की अर्थव्यवस्था और भविष्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर रही है।
अमेरिकी कर्ज बढ़ने के पीछे कई वजहें हैं। ट्रंप और बाइडन प्रशासन के दौरान हुए बड़े सरकारी खर्च के अलावा बढ़ती बुजुर्ग आबादी ने भी संघीय बजट पर दबाव बढ़ाया है। हर दिन करीब 10,000 बेबी बूमर्स के सेवानिवृत्त होने के कारण सोशल सिक्योरिटी और मेडिकेयर जैसी योजनाओं पर सरकारी खर्च लगातार बढ़ रहा है।
वित्त विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच महीनों में ही राष्ट्रीय कर्ज में करीब 1 ट्रिलियन डॉलर की वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों के लिए चिंता की बात सिर्फ कर्ज का मौजूदा स्तर नहीं, बल्कि इसकी तेज रफ्तार से हो रही बढ़ोतरी भी है।
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