अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपनी ही सरकार के भीतर उभरते मतभेदों के संकेत दिए हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड के रुख को अपने मुकाबले “कुछ नरम” बताया, हालांकि उन पर पूरा भरोसा जताया। ट्रंप ने साथ ही यह भी कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी समझौते की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
एयर फोर्स वन में फ्लोरिडा से वॉशिंगटन लौटते समय ट्रंप ने कहा, “हमारी सोच पूरी तरह एक जैसी नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई अपनी भूमिका के लिए उपयुक्त नहीं है। मैं इस बात पर बेहद स्पष्ट हूं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है। मुझे लगता है कि वह इस मुद्दे पर थोड़ी नरम हैं, लेकिन यह ठीक है।”
गौरतलब है कि ट्रंप आम तौर पर ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के चल रहे अभियान को लेकर आंतरिक मतभेदों को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार नहीं करते रहे हैं। यह संघर्ष अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस मामले में संतुलित और सतर्क रुख अपनाया है, जबकि कुछ अन्य रिपब्लिकन नेता इसके अमेरिका के भीतर आर्थिक और राजनीतिक असर को लेकर चिंतित बताए जा रहे हैं।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी ट्रंप प्रशासन के भीतर अलग-अलग आकलन सामने आए हैं। युद्ध से पहले कुछ अधिकारियों ने दावा किया था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के बेहद करीब है। वहीं दूसरी ओर, खुद ट्रंप समेत कुछ नेताओं का कहना रहा कि पिछले साल की सैन्य कार्रवाई ने ईरान के कार्यक्रम को काफी हद तक कमजोर कर दिया था।
हालांकि, ईरान लगातार यह कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
इसी बीच, तुलसी गबार्ड ने हाल में सांसदों को बताया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम के भंडार के स्थान की जानकारी है। हालांकि उन्होंने यह खुलासा नहीं किया कि अमेरिका के पास उसे नष्ट करने की क्षमता है या नहीं। वहीं, नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के पूर्व प्रमुख जो केंट ने भी इस महीने अपने पद से इस्तीफा देते हुए कहा कि ईरान से अमेरिका को तत्काल कोई सीधा खतरा नहीं है।
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