NCERT-CBSE में पदों का बड़ा संकट, 57% और 44% सीटें खाली; जल्द आएंगी भर्तियां

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NCERT और CBSE जैसे देश के प्रमुख शिक्षा बोर्ड और संस्थान खुद कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं।
संसद की शिक्षा मामलों की स्थायी समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, NCERT में 1,596 पद खाली हैं, जबकि CBSE में 933 पदों पर नियुक्तियां नहीं हुई हैं। समिति ने रिक्त पदों को जल्द भरने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है।
NCERT में आधे से ज्यादा पद खाली
अक्टूबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार, NCERT में कुल 2,844 पद स्वीकृत हैं। इनमें केवल 1,248 पदों पर अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 1,596 पद खाली पड़े हैं। यानी संस्था के 56 प्रतिशत से अधिक स्वीकृत पदों पर नियुक्ति नहीं हुई है।
संसदीय समिति ने कहा कि NCERT देश की शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नई शिक्षा नीति 2020 को तैयार करने में भी संस्था का अहम योगदान रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में पद खाली होने से उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होने की आशंका है।
CBSE में 44% पद रिक्त
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE में भी करीब 44 प्रतिशत पद खाली हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड में 2,117 पद स्वीकृत हैं, लेकिन 933 पदों पर कर्मचारी तैनात नहीं हैं।
समिति ने माना कि लंबे समय तक पद खाली रहने से संस्थाओं की प्रशासनिक और शैक्षणिक क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए रिक्त पदों को जल्द भरने की जरूरत बताई गई है।
65 शिक्षा परिषदों के लिए एक नियामक का सुझाव
समिति ने नई शिक्षा नीति के अनुरूप देश की 65 शिक्षा परिषदों की निगरानी के लिए एकीकृत नियामक बनाने की सिफारिश की है। इसके पीछे उद्देश्य शिक्षा के मानकों में एकरूपता लाना और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना है।
तीसरी भाषा के लिए शिक्षक नियुक्त करने की सिफारिश
रिपोर्ट में स्कूलों में तीसरी भाषा की पढ़ाई से जुड़ी चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया है। समिति ने कहा कि कक्षा छह के बाद तीसरी भाषा पढ़ाने के लिए पर्याप्त समय और संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
इसके लिए जरूरी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति करने के साथ विद्यार्थियों और अभिभावकों को तीसरी भाषा के महत्व के बारे में जागरूक करने की सिफारिश की गई है।
73% छात्रों के पढ़ाई छोड़ने पर चिंता
समिति ने इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने से पहले करीब 73 प्रतिशत विद्यार्थियों के शिक्षण संस्थान छोड़ने की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट में इसके कारणों की पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की सिफारिश की गई है।
समिति के मुताबिक, शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए संस्थानों में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराना और छात्रों को पढ़ाई जारी रखने के लिए जरूरी सहयोग देना अहम है।

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