जंतर-मंतर पर जातिगत आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन, आज जुट सकती है बड़ी संख्या में भीड़; पुलिस अलर्ट

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जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ जंतर-मंतर पर जुटे सैकड़ों युवा, आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग; आज बढ़ सकती है भीड़

शुक्रवार को जाति आधारित आरक्षण के विरोध में सैकड़ों युवा जंतर-मंतर पर जुटे। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण का आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति तय करने और मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा की मांग उठाई। देर शाम पुलिस और सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटा दिया। शनिवार को कई राज्यों से युवाओं के दिल्ली पहुंचने की संभावना के चलते भीड़ बढ़ सकती है।

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी, इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर पहुंचे। सुरक्षा के मद्देनजर मौके पर दो स्तर की बैरिकेडिंग की गई थी। प्रदर्शन स्थल पर मंच बनाया गया था और प्रदर्शनकारी बैनर-पोस्टर के साथ केसरिया व तिरंगा झंडे लेकर पहुंचे।

प्रदर्शन में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, करणी सभा समेत विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और जातीय संगठनों से जुड़े लोग भी शामिल हुए। सोशल मीडिया के जरिए भी प्रदर्शन के लिए लोगों को जुटाया गया था।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा और अन्य अवसरों में सहायता मिलनी चाहिए। हर्ष दूबे ने मौजूदा आरक्षण व्यवस्था को भेदभावपूर्ण बताते हुए इसमें बदलाव की जरूरत बताई। मेरठ से आए मुकुल कौशिक ने कहा कि आरक्षण का आधार जाति नहीं, आर्थिक स्थिति होनी चाहिए।

अजीत भारती ने आरक्षण व्यवस्था की हर 10 साल में समीक्षा की मांग की। वहीं, अनिल मिश्रा ने क्रीमी लेयर का नियम लागू करने और एससी, एसटी व ओबीसी से जुड़ी नीतियों में बदलाव की मांग की। डीयू छात्र सुरजीत राठौर ने कहा कि आरक्षण का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम और यूजीसी के नियमों पर भी सवाल उठाए। शनिवार को संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष नजर रखी जा रही है।

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