इजरायल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है।
प्रधानमंत्री पद के लिए गादी आइसेनकोट की दावेदारी को उस समय निर्णायक मजबूती मिली, जब अरब दलों के गठबंधन ज्वाइंट लिस्ट ने उनके समर्थन का ऐलान कर दिया। गुरुवार देर शाम गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति आइजक हरजोग से मुलाकात कर आइसेनकोट के पक्ष में समर्थन पत्र सौंपा। इसके साथ ही देश में नई सरकार के गठन का रास्ता खुलता दिखाई दे रहा है।
ज्वाइंट लिस्ट के 11 सांसदों के अलावा आठ सांसदों वाली अरब पार्टी राएम भी पहले ही आइसेनकोट को समर्थन देने की घोषणा कर चुकी है। इस तरह उन्हें अब तक कुल 67 सांसदों का साथ मिल गया है। इजरायल की 120 सदस्यीय संसद नीसेट में बहुमत हासिल करने के लिए 61 सांसदों का समर्थन आवश्यक है।
हालिया चुनाव में पूर्व सेना प्रमुख आइसेनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 48 सीटें जीती थीं। दूसरी ओर, बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला दक्षिणपंथी गठबंधन 53 सीटों पर सिमट गया। अन्य दलों का समर्थन हासिल करने में नाकाम रहने के कारण नेतन्याहू बहुमत का आंकड़ा नहीं छू सके।
इस बीच, नेतन्याहू के गठबंधन को गुरुवार को एक और बड़ा झटका लगा। सात सांसदों वाली यूनाइटेड टोरा जूडिज्म (यूटीजेड) ने गठबंधन से अलग होने की घोषणा कर दी। पार्टी ने संसद में स्वतंत्र रूप से बैठने का फैसला किया है। इसके बाद नेतन्याहू के साथ केवल 46 सांसद रह गए हैं।
आइसेनकोट और ज्वाइंट लिस्ट के बीच सरकार की नीतियों को लेकर भी सहमति बनी है। प्रस्तावित समझौते के मुताबिक, इजरायल की यहूदी पहचान बरकरार रखते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत शासन चलाया जाएगा। साथ ही हमास को आतंकवादी संगठन मानते हुए उसकी सैन्य क्षमता समाप्त करने की नीति पर आगे बढ़ने की बात कही गई है।
इसके अतिरिक्त सेना में अनिवार्य भर्ती से जुड़े नियमों में बदलाव और देश की स्थापना के समय नागरिक अधिकारों के लिए तय किए गए सिद्धांतों का पालन करने पर भी सहमति बनी है।
इन मुद्दों पर सहमति के बाद ज्वाइंट लिस्ट के नेताओं ने राष्ट्रपति को आइसेनकोट के समर्थन का औपचारिक पत्र सौंप दिया। गठबंधन में हदाश, ताल और बलद शामिल हैं, जबकि राएम ने चुनाव अलग लड़कर अपनी पहचान बनाए रखी थी।
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