नेपाल में बाढ़ से तबाही, हाइड्रो प्रोजेक्ट्स से 900+ लोग लापता; टनल का ‘क्राउन हेड’ मिलने के बाद रेस्क्यू तेज
नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है।
नेपाली सेना समेत विभिन्न एजेंसियों की टीमें नौ जलविद्युत परियोजनाओं से लापता 900 से ज्यादा कर्मचारियों और मजदूरों की तलाश में जुटी हैं। बाढ़, मलबे और क्षतिग्रस्त सुरंगों के कारण रेस्क्यू टीमों के सामने लगातार नई चुनौतियां आ रही हैं।
इस बीच, अपर त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर परियोजना में बचाव दल को अहम कामयाबी मिली है। टीम ने सुरंग के ऊपरी हिस्से, जिसे ‘क्राउन हेड’ कहा जाता है, का पता लगा लिया है। अब नेपाली सेना उस रास्ते को चौड़ा कर रही है, ताकि ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ विशेषज्ञों को सुरंग के भीतर भेजकर फंसे लोगों की तलाश की जा सके।
हाइड्रोपावर परियोजनाओं में कितने लोग लापता?
बाढ़ के बाद लापता लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़े सामने आए हैं। इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल के अनुसार नौ जलविद्युत परियोजनाओं से 537 कर्मचारी और मजदूर लापता हैं। वहीं, नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने यह संख्या 933 बताई है।
रविवार तक नेपाल और तिब्बत में आपदा से 810 लोगों की मौत की सूचना थी। इनमें नेपाल में 794 और तिब्बत में 16 मौतें शामिल हैं। दोनों क्षेत्रों में कुल 3,048 लोग लापता बताए गए हैं। नेपाल में 2,502 और तिब्बत में 546 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है।
नेपाल में लापता लोगों की सूची में 592 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
त्रिशूली-3A में क्या मिला?
अपर त्रिशूली-3A परियोजना तक सड़क संपर्क टूटने के बाद नेपाली सेना ने हेलीकॉप्टर की मदद से एक्सकेवेटर, बुलडोजर और मलबा हटाने वाली मशीनें वहां पहुंचाईं। इसके बाद रेस्क्यू टीमों ने बारिश के बीच रातभर अभियान चलाया।
सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजाराम बस्नेत के अनुसार, विशेषज्ञों ने सुरंग के ‘क्राउन हेड’ का पता लगाया। टीम ने करीब 2×3 फीट का रास्ता बनाया, जिसके भीतर लगभग सात मीटर व्यास वाली पानी की सतह दिखाई दी।
एक विशेषज्ञ ने रास्ते से अंदर जाकर जीवन के संकेत तलाशने की कोशिश की, लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है। सेना अब रास्ते को चौड़ा कर रही है, ताकि अतिरिक्त विशेषज्ञ ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ सुरंग में प्रवेश कर सकें।
कई मजदूरों को सुरक्षित निकाला गया
अपर त्रिशूली-1 परियोजना में करीब 300 श्रमिकों के सुरंग में फंसे होने की आशंका थी। इनमें से 254 को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि बाकी की तलाश जारी है।
अपर त्रिशूली-3B में पहले लापता बताए गए 122 श्रमिकों में से 91 को बचा लिया गया है। 31 अभी भी लापता हैं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। टीमें नदी किनारों, तबाह बस्तियों और मलबे से भरी सुरंगों में लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं।
149 भारतीयों को बचाया गया
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल में 149 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इससे पहले जारी सूची में 275 भारतीय नागरिकों के लापता होने और भारतीय मूल के 128 लोगों से संपर्क नहीं होने की जानकारी सामने आई थी।
MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि स्थिति लगातार बदल रही है और अलग-अलग सूचियों का मिलान किया जा रहा है। उन्होंने अपुष्ट आंकड़ों पर भरोसा नहीं करने की सलाह दी।
तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र में लापता 546 लोगों में 261 विदेशी नागरिक बताए गए हैं। इनमें 49 भारतीय भी शामिल हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ये 49 भारतीय नेपाल में लापता भारतीयों की सूची में पहले से शामिल हैं या नहीं।
भारत ने बढ़ाई राहत सहायता
चीन की तरफ फंसे भारतीयों की भी वापसी जारी है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दो दिनों में 598 भारतीय चीन से सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके थे, जबकि वहां मौजूद करीब 900 भारतीयों के सुरक्षित होने की जानकारी थी।
भारत ने नेपाल के राहत अभियान में मदद बढ़ाते हुए चार राहत उड़ानों से 68.5 टन सामग्री भेजी है। इसके अलावा 13 सदस्यीय टनल-रेस्क्यू टीम और छह फोरेंसिक टीमों को भी नेपाल भेजा गया है।
बाढ़ से क्षतिग्रस्त संपर्क व्यवस्था बहाल करने के लिए 230 फीट लंबे सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज का सामान भी नेपाल पहुंच चुका है। सात अन्य बेली ब्रिज के लिए आवश्यक सामग्री की आपूर्ति भी की जा रही है।
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