संयुक्त राष्ट्र में भारत की मजबूत मौजूदगी, महिला नेतृत्व और शांति स्थापना पर रखा पक्ष

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UN सुरक्षा परिषद में भारत का दमदार पक्ष, महिला सशक्तिकरण और शांति मिशनों की उपलब्धियां गिनाईं

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में आयोजित ‘महिला, शांति और सुरक्षा’ विषयक खुली बहस के दौरान भारत ने महिला सशक्तिकरण और शांति स्थापना के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों को मजबूती से रखा। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि महिलाओं की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक भागीदारी बढ़ाने से न केवल समाज मजबूत होता है, बल्कि शांति और विकास को भी नई गति मिलती है।

स्थानीय शासन से संसद तक बढ़ी महिलाओं की भागीदारी

भारत ने सुरक्षा परिषद को बताया कि संवैधानिक आरक्षण की व्यवस्था के कारण देश की स्थानीय स्वशासी संस्थाओं में 10 लाख से अधिक महिलाएं निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रही हैं। वर्तमान में स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी एक-तिहाई से अधिक है।

भारत ने यह भी रेखांकित किया कि महिला आरक्षण अधिनियम 2023 के जरिए महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर द्रौपदी मुर्मु के आसीन होने का उल्लेख करते हुए इसे महिला नेतृत्व की ताकत का प्रतीक बताया।

शांति मिशनों में भारतीय महिलाओं की अहम भूमिका

भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को ‘महिला, शांति और सुरक्षा’ एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। भारत ने याद दिलाया कि वर्ष 2007 में उसने लाइबेरिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन के लिए पूरी तरह महिला पुलिस इकाई भेजकर एक नई मिसाल कायम की थी। इस पहल ने स्थानीय महिलाओं को सुरक्षा सेवाओं में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।

वर्तमान में 160 से अधिक भारतीय महिला शांतिदूत विभिन्न संयुक्त राष्ट्र मिशनों में सेवाएं दे रही हैं। ये अधिकारी स्थानीय समुदायों के साथ विश्वास कायम करने, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा लैंगिक हिंसा से जुड़े मामलों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

भारतीय महिला अधिकारियों को मिला वैश्विक सम्मान

संयुक्त राष्ट्र ने भारतीय महिला शांतिदूतों के योगदान को कई बार सम्मानित किया है। इसी क्रम में मेजर अभिलाषा बड़क को वर्ष 2026 में प्रतिष्ठित ‘यूएन जेंडर एडवोकेट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। इससे पहले भी भारतीय अधिकारियों को इस क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल चुकी है।

वैश्विक स्तर पर प्रशिक्षण और सहयोग पर जोर

भारत ने बताया कि दिल्ली स्थित सेंटर फॉर यूनाइटेड नेशंस पीसकीपिंग वर्ष 2016 से दुनिया भर की महिला सैन्य अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। इसके अलावा भारत ने फरवरी 2025 में ग्लोबल साउथ की महिला शांतिदूतों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी की थी, जिसमें 35 देशों की प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।

भारत ने कहा कि महिलाओं की सार्थक भागीदारी के बिना स्थायी शांति और सुरक्षा की कल्पना अधूरी है। सुरक्षा परिषद के मंच पर भारत ने स्पष्ट किया कि महिला सशक्तिकरण केवल सामाजिक न्याय का विषय नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता की बुनियादी शर्त भी है।

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