ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन में दो अमेरिकी हवाई ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। ईरान ने इसे लारक द्वीप पर अमेरिकी-इजरायली हमले का जवाब बताया है।
तस्नीम न्यूज के मुताबिक, IRGC ने कहा कि अजराक स्थित मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस और किंग हुसैन एयर बेस को निशाना बनाया गया। हमले में दोनों ठिकानों के तकनीकी और रखरखाव से जुड़े बुनियादी ढांचे के साथ-साथ लड़ाकू विमानों की तैनाती वाले क्षेत्रों को भी निशाना बनाने का दावा किया गया है। IRGC ने कहा कि हमले से अमेरिकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है।
होर्मुज को लेकर ईरान की चेतावनी
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि अमेरिका के किसी भी नए हमले का जवाब और अधिक ताकत के साथ दिया जाएगा। IRGC ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई से होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण प्रभावित नहीं होगा।
होर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित एक बेहद अहम समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए दुनिया के बड़े हिस्से की तेल आपूर्ति होती है। इसी वजह से क्षेत्र में किसी भी सैन्य तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
अमेरिका ने लारक द्वीप पर बनाया निशाना
ईरानी हमले से पहले अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के लारक द्वीप पर दो लॉन्च सिस्टम को निशाना बनाने की पुष्टि की थी।
रॉयटर्स के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी सेना ने लारक द्वीप पर ईरान के दो लॉन्चरों पर हमला किया। अधिकारी के अनुसार, IRGC की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी और उसके सैनिक होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने के लिए इस्तेमाल होने वाले रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी कर रहे थे।
रॉयटर्स ने बताया कि जुलाई के अंत के बाद ईरानी क्षेत्र पर यह अमेरिका का पहला ज्ञात हमला था।
कहां है लारक द्वीप?
लारक द्वीप होर्मुज द्वीप के दक्षिण और केशम द्वीप के पूर्व में स्थित है। यह तेहरान से करीब 1,100 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में है।
अमेरिकी हमले के बाद ईरान की ओर से जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कथित जवाबी कार्रवाई से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है।
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