वार्ता बुधवार को बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई।
दोनों देशों ने बातचीत जारी रखने पर सहमति तो जताई, लेकिन इस दौर में किसी भी प्रमुख विवादित मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी। खास बात यह रही कि परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा को अगली वार्ता के लिए टाल दिया गया।
इस बार बातचीत का मुख्य फोकस होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की निर्बाध आवाजाही और अमेरिका में फ्रीज ईरानी संपत्तियों की रिहाई पर रहा। रायटर की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच कोई प्रत्यक्ष बैठक नहीं हुई। कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों की मौजूदगी में दोनों पक्षों ने अलग-अलग तकनीकी सत्रों में अपने-अपने प्रस्ताव रखे।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने किया, जबकि अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर दोहा पहुंचे थे, लेकिन उन्होंने तकनीकी वार्ता में हिस्सा नहीं लिया। बातचीत खत्म होने के बाद दोनों पक्षों ने केवल इतना कहा कि वार्ता का सिलसिला जारी रहेगा, जबकि किसी भी अहम मुद्दे पर सहमति बनने की पुष्टि नहीं की गई।
कतर के विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह दौर जून में हुए अंतरिम समझौते और स्विट्जरलैंड में हुई उच्चस्तरीय वार्ता के आधार पर आयोजित किया गया था। मंत्रालय के अनुसार, समझौता ज्ञापन (एमओयू) के क्रियान्वयन से जुड़े कुछ तकनीकी बिंदुओं पर सकारात्मक प्रगति हुई है और अगला दौर जल्द आयोजित किया जाएगा।
परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा फिलहाल टली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत सही दिशा में बढ़ रही है। हालांकि वार्ता से जुड़े सूत्रों ने स्पष्ट किया कि दोहा में हुई तकनीकी बैठकों में परमाणु कार्यक्रम पर कोई चर्चा नहीं हुई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी संकेत दिए कि इस संवेदनशील मुद्दे पर अलग दौर की बातचीत होगी।
छह अरब डॉलर की फ्रीज संपत्ति पर ईरान का जोर
वार्ता के दौरान ईरान ने अमेरिका में फंसी अपनी करीब छह अरब डॉलर की संपत्तियों को जारी करने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। तेहरान का कहना है कि अंतरिम समझौते के तहत किए गए सभी वादों को एक साथ लागू किया जाना चाहिए।
उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने बताया कि कतर के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में इन फंडों के इस्तेमाल की रूपरेखा पर चर्चा हुई। उनके मुताबिक, इस राशि का उपयोग मानवीय जरूरतों और आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए किया जाएगा। इसके अलावा समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए दोनों देशों के बीच सीधा संपर्क तंत्र स्थापित करने पर भी सहमति बनी।
होर्मुज पर ईरान का सख्त रुख बरकरार
वार्ता के समानांतर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपना कड़ा रुख भी दोहराया। ईरानी मीडिया के मुताबिक, खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स ने कहा कि होर्मुज की सुरक्षा और नियंत्रण ईरान की संप्रभुता से जुड़ा विषय है और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का तुरंत जवाब दिया जाएगा।
ईरान ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा का ढांचा खाड़ी देशों को मिलकर तय करना चाहिए, न कि बाहरी सैन्य गठबंधनों को। हालांकि दोहा में समुद्री मार्ग पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई, लेकिन होर्मुज को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी बरकरार हैं।
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