झारखंड में छात्रों पर लाठी-डंडों से हमला, कई जिलों में JMM कार्यकर्ताओं से झड़प; BJP ने सरकार को घेरा

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झारखंड में JPSC-JSSC छात्रों का प्रदर्शन उग्र, कई जिलों में JMM कार्यकर्ताओं से झड़प; BJP ने सरकार को घेरा

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं और JPSC-JSSC से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन शुक्रवार को कई जिलों में तनावपूर्ण हो गया। JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के आह्वान पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन करने निकले छात्रों का विभिन्न स्थानों पर विरोध हुआ। रांची, गिरिडीह, हजारीबाग और गढ़वा में छात्रों और सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कार्यकर्ताओं के बीच कथित तौर पर झड़प, धक्का-मुक्की और मारपीट हुई।

रांची में पुतला दहन कार्यक्रम को लेकर विवाद शुरू हुआ। छात्रों का आरोप है कि JMM कार्यकर्ताओं ने उनके प्रदर्शन का विरोध किया और उन्हें रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई।

गिरिडीह के झंडा मैदान में भी छात्रों और JMM कार्यकर्ताओं के आमने-सामने आने के बाद हंगामा हुआ। छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बनी रही। सोशल मीडिया पर घटना से जुड़े कई वीडियो भी सामने आए हैं, हालांकि उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

रांची, गिरिडीह के अलावा हजारीबाग और गढ़वा में भी आंदोलन का असर दिखाई दिया। प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया।

घटनाओं के बाद भाजपा ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि छात्रों के प्रदर्शन को रोकने के लिए कथित तौर पर JMM कार्यकर्ताओं को आगे किया गया। उन्होंने कहा कि छात्रों को अपनी मांगें लोकतांत्रिक तरीके से रखने का अधिकार है और सीबीआई जांच की मांग पर सरकार को विचार करना चाहिए।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने भी कथित मारपीट की घटनाओं की निंदा की। उन्होंने दावा किया कि चार जिलों में कई छात्र घायल हुए हैं और प्रशासन से दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की मांग की।

वहीं, JMM ने छात्रों के आरोपों पर अलग रुख अपनाया। गिरिडीह JMM जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि अदालत के आदेशों का सम्मान किया जाना चाहिए और विरोध के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीकों का पालन होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री का पुतला दहन करने को अनुचित बताते हुए कानूनी तरीके से अपनी बात रखने की अपील की।

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