मनी लॉन्ड्रिंग पर CJI सूर्यकांत की बड़ी टिप्पणी, बोले- 100 रुपये में सिर्फ 1 रुपया ही वसूल पाती हैं एजेंसियां

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चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अपराधों की गंभीरता पर चिंता जताई।

कैम्ब्रिज में आर्थिक अपराध पर आयोजित 43वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने कहा कि कानून लागू करने वाली एजेंसियां मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए हेर-फेर की गई 100 रुपये की रकम में से केवल 1 रुपया ही वसूल कर पाती हैं।

CJI ने कहा कि आर्थिक अपराधी लगातार नए और जटिल तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, विदेशों में छिपे आरोपियों को वापस लाने और दूसरे देशों में मौजूद अवैध संपत्तियों की रिकवरी के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की कमी भी बड़ी बाधा है।

उन्होंने बताया कि दुनिया में एक साल में मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए इधर-उधर की जाने वाली रकम इतनी विशाल है कि उससे धरती के हर व्यक्ति के लिए एक साधारण लैपटॉप खरीदा जा सकता है। उनके मुताबिक, इस अवैध संपत्ति के 100 हिस्सों में से 99 हिस्से केवल रिपोर्टों और भाषणों तक सीमित रह जाते हैं, जबकि वास्तविक तौर पर सिर्फ 1 हिस्सा ही बरामद हो पाता है।

CJI ने ‘अर्थशास्त्र’ का दिया उदाहरण

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने अपने संबोधन में कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इस प्राचीन ग्रंथ में भी अधिकारियों द्वारा राजस्व में हेर-फेर की आशंका का उल्लेख मिलता है। साथ ही, इसमें ऑडिट, क्रॉस-वेरिफिकेशन और गलत तरीके से अर्जित संपत्ति की जब्ती जैसे उपायों की बात कही गई है।

‘रिकवर की जाने वाली संपत्ति बहुत कम’

भारत में आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए मौजूद कानूनों और न्यायिक प्रक्रियाओं का जिक्र करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि भारत ने प्रत्यर्पण और आपसी कानूनी सहायता के लिए दूसरे देशों के साथ समझौते किए हैं। इसके बावजूद वास्तविक रूप से बरामद होने वाली संपत्ति बेहद कम है।

उन्होंने कहा कि अवैध संपत्ति और आर्थिक अपराधों का विस्तार अंतरराष्ट्रीय संधियों और सहयोग की गति से कहीं तेज है। इसलिए कोई भी देश अकेले इन अपराधों से प्रभावी तरीके से नहीं निपट सकता।

CJI ने कहा कि संपत्ति जब्ती, लाभकारी स्वामित्व रजिस्टर और वित्तीय खुफिया जानकारी साझा करने जैसे कई तंत्र मौजूद हैं, लेकिन आर्थिक अपराधियों से निपटने के लिए देशों के बीच और तेज व प्रभावी सहयोग की जरूरत है।

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