एलपीजी पर बढ़ा आर्थिक बोझ, तेल कंपनियों को हर सिलिंडर पर 700 रुपये का नुकसान
देश में रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार कई कदम उठा रही है, लेकिन इसकी कीमत सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को भारी वित्तीय दबाव के रूप में चुकानी पड़ रही है। अधिकारियों के मुताबिक, कंपनियों को प्रत्येक घरेलू एलपीजी सिलिंडर पर करीब 700 रुपये का नुकसान हो रहा है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में बताया कि सरकार ने एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात को सुचारु बनाए रखने जैसे कदम उठाए हैं। उनका कहना है कि बढ़ती मांग के बीच आपूर्ति में किसी तरह की बाधा न आए, इसके लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
तीन दिनों में 1.43 करोड़ सिलिंडरों की डिलीवरी
सरकार के प्रयासों का असर वितरण पर भी दिखाई दिया है। मंत्रालय के अनुसार, पिछले तीन दिनों में देशभर में 1.43 करोड़ एलपीजी सिलिंडर उपभोक्ताओं तक पहुंचाए गए। मांग और आपूर्ति के अंतर को कम करने के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत में कच्चे तेल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। साथ ही पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे ईंधन उपलब्धता को लेकर फिलहाल कोई चिंता नहीं है।
एयरलाइनों को राहत देने के लिए एटीएफ कीमत तय
इस बीच सरकार ने घरेलू विमानन क्षेत्र को राहत देने के उद्देश्य से एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमत 86.32 रुपये प्रति लीटर निर्धारित की है। यह दर अगले तीन वर्षों तक लागू रहेगी।
सरकार का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन कीमतों में आई तेजी के बीच यह कदम एयरलाइनों की लागत को नियंत्रित रखने में मदद करेगा। साथ ही यात्रियों पर किराए का अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना भी कम होगी।
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